कौन होते हैं अघोरी

भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है। अघोरपंथ के जन्मदाता भी भगवान शिव ही हैं।


भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है। अघोरपंथ के जन्मदाता भी भगवान शिव ही हैं। पवित्र श्रावण मास चल रहा है। इस महीने में मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा का विधान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव की पूजा के दो तरीके बताए गए हैं पहला है सात्विक व दूसरा तामसिक। सात्विक पूजा के अंतर्गत भगवान शिव की पूजा फल, फूल, जल आदि से की जाती है। वहीं तामसिक पूजा के अंतर्गत तंत्र-मंत्र आदि से शिव को प्रसन्न किया जाता है।

कौन होते हैं अघोरी?

अघोरी हमेशा से लोगों की जिज्ञासा का विषय रहे हैं। अघोरियों की साधना विधि सबसे ज्यादा रहस्यमयी है। उनकी अपनी शैली, अपना विधान है, अपनी अलग विधियां हैं। अघोर उसको कहते है जो बहुत ही सरल और सहज हो | जो किसी में भेदभाव न रखता हो | जो हर चीज को समान भाव रखता हो | वे सड़ते जीव के मांस को भी उतना ही स्वाद लेकर खाते हैं, जितना स्वादिष्ट पकवानों को स्वाद लेकर खाया जाता है।

अलग है अघोरियों की दुनिया

अघोरी की हर बात निराली होती है | वो जिसपर पर्सन होजाए उसको सब कूच दे देते है | कठिन तपस्या से प्राप्त कीहुई सिद्धियों का अपने स्वार्थ के लिए उपयोग नहीं करते | अघोरियों की कई बातें ऐसी हैं जो सुनकर आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे। सत्चा अघोरी कितनी कठिन साधना करता है ये हम सब लोग सोच भी नहीं सकते | हम कभी वैसे साधना कभी न पाए एक दिन भी पर वो अपनी पुरे जीवन काल में कठिन साधना करते है|

हम आपके बहुत सी ऐसे बाते बताने का प्रयास करेंगे जिनसे आप अघोरी के जीवन को जान पाए और सचे और पाखंडी लोगो के बीच का अंतर समाज पाए |