कौरव सो नहीं एक सो दो थे कौरवो के जन्म से जुडी रोचक कथा

Lumberjack Cake
January 9, 2018
Ravan ne Bali se Maangi Sahayata
January 16, 2018

कौरव सो नहीं एक सो दो थे कौरवो के जन्म से जुडी रोचक कथा

आप सभी को यह सुनकर आश्चर्य होता होगा कि एक ही माँ की एक सो एक संताने कैसे हो सकती हैं ? माता गांधारी एवम धृतराष्ट्र की एक सो एक संताने थी जिन्हें महाभारत काल में कौरव कहा जाता था | जाने इसके पीछे का पूरा रहस्य |

 

आज हम बात कर रहे है गांधारी कि जो गंधार नरेश कि पुत्री थी और वो एक शिव भक्त थी । अपने बच्पन से हि भगवान शिव कि भक्ति मे लीन रहती थी। एकदिन ऐसा आया कि शिवजी ने उसको 100 पुत्र का वरदान दिय। समय के साथ गांधारी कि विवाह कि आयु हो गयि और एक दिन उनके मेहल मे उनके दिवाह क प्रस्ताव आया सब बहुत पर्सन हुए गांधारी ने मन्हिमन मे धृतराष्ट्र को अपना पति मान लिया, उससमय एक बात पतालगी कि धृतराष्ट्र जन्म से ही देख्न नहि सकता था। पर गांधारी एक पतिव्रता नारी थी उसने मन से अपना पति मानलिया था। उसने रिश्ता सविकार लिया और अपने आँखों पर जन्म भर के लिये पट्‌टी बांधली । दरह्सल महाभारत का युद्ध उसिशण आरम्भ हो गाया था इसका कारण इस विवाह कि घट्ना से है जो शकुनी ने मन मे रचना आरम्भ कर दिया था। धृतराष्ट्र की इच्छा थी कि उनकी पत्नी नेत्रों वाली हो ताकि वो उनकी नेत्रों से दुनियाँ को देख सके, राज्य संभाल सके | जब धृतराष्ट्र को गांधारी कि प्रतिज्ञा के बारे मे पता लगा तो वह बहुत क्रोदित हो उठे क्यूंकि इस कारण धृतराष्ट्र को हस्तिनापुर का राजा नहीं बनाया गया और पांडू का राज तिलक किया गया |

अपने क्रोध के कारण धृतराष्ट्र ने गांधारी को अपने समीप नहीं आने देने का फैसला किया । यह जानने के बाद शकुनी जो कि गांधारी का भाई था उसने धृतराष्ट्र को शिव जी के वरदान के बारे में बताया और कहा आपका पुत्र ही आपके स्वप्नों को पूरा करेगा और अपने 99 भाईयों के होते वो कभी परास्त नहीं हो सकेगा | यह सुन महत्वाकांक्षी धृतराष्ट्र को अपनी इच्छा पूरी करने का एक रास्ता नजर आया | अतः धृतराष्ट्र ने गांधारी को पत्नी के रूप में स्वीकार किया |

उसी वक्त महर्षि वेदव्यास हस्तिनापुर पहुँचे और उन्होंने बताया कि किसी स्त्री के गर्भ से सो पुत्रो का जन्म होना न मुमकिन हैं लेकिन शिव का वरदान व्यर्थ नहीं होता अतः यह मांस का टुकड़ा नहीं बल्कि इसमें गांधारी के एक सो एक संतानों के बीज हैं | गांधारी ने वरदान में भगवान से एक पुत्री की भी कामना की थी इस प्रकार उन्हें एक सो एक संतानों का सौभाग्य प्राप्त हैं |

इसके बाद महर्षि वेद व्यास ने एक सो एक मटकों में गर्भ की तरह वातावरण निर्मित किया | इसके बाद सबसे पहले जिस पुत्र का जन्म हुआ उसका नाम दुर्योधन रखा गया | इसके बाद दासी को भी पुत्र की प्राप्ति हुई | अतः कौरवो की संख्या सो नहीं एक सो दो थी जिनमे बहन दुशाला सहित सो संताने गांधारी की एवम एक संतान उनकी दासी की थी |

यह था कौरवो के जन्म से जुड़ा सच | महाभारत का युद्ध धर्म की रक्षा के लिए लड़ा गया था जिसमे कौरव अधर्मी एवम पांडव धर्मी थे | इस महाभारत के रचियता महर्षि वेदव्यास थे उनके बोलने पर महाभारत को स्वयं गणपति जी ने लिखा था एवम इस महाभारत के सूत्रधार स्वयं श्री कृष्ण थे जिन्होंने धर्म की इस लड़ाई में पांडवों का मार्गदर्शन किया था |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *