Shri Atmaram Ji Ka Jeevan Charitra

इनके जन्म की कोई निश्चित तिथि नहीं है । लोगो द्वारा पता चलता है की जब वो 7 या 8 वर्ष के थे तब उनके माता पिता का स्वर्गवास हो गया था उनकी दादी ने उनका पालन पोषण किया था १२ से १४ वर्ष की आयु में उनकी दादी का भी स्वरगवास हो गया था । कहते है की उनके पास बातचपन में हनुमान जी वेश बदल कर एते थे और उनका पालन पोषण करते थे । जब वो थोड़े बड़े हुए तो अपने आजीविका को चलने के लिए मुनीम का काम करते थे । उस दुकान का मालिक उनको अपने बेटे की तरह समझता था। एक समय की बात है जब उस दूकान में से कुच कीमती सामान चोरी हो गया उसको लगा की ये किसी ने कोई कर लिया है सब जगह ढूंढ़ने के बाद उसको लगा की बाबा जी ने तो कहे सामान छुपा लिया । दूकानदार ने ये जानना चाहा की ये सामान उन्हों ने तो नहीं चुराया । इस बात का उनके मन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा तब वो दूकानदार से कहा की आप को मेरे पर इतना विशवास नहीं की कोई की मेरे को आप अपना बीटा समझते थे कोई बीटा अपने पिता के सामान को क्यों चुराएगा। तब उन्हों ने खा की संसार के सभी बंधन झूठे है और वो अपने असली माता पिता के खोज करेंगे । तब वो अपने घर आगये और ४० दिन तक अपने घर से बहार नहीं निकले इन दिनों में उन्हों ने तपस्या की और हनुमान जी को अपना गुरो और माता पिता मान कर राम नाम का तप किया ४० दिन बाद उनको हनुमान जी के दर्शन हुए और उनको ज्ञान प्राप्ति हुई। बाबा जी ने कहा की कलयुग में राम नाम का जप करे।