किडनी खराब होने के लक्षण और उपचार

किडनी के रोगियों के लिए 3 रामबाण प्रयोग
April 15, 2019

किडनी खराब होने के लक्षण और उपचार

किडनी खराब होने के लक्षण और आयुर्वेदिक जडी बुटी से उपचार शरीर के कुछ अंग बहुत ही अहम होते हैं क्योंकि उनसे ही पूरे शरीर का सिस्टम सुचारू रूप से चलता है जिनमे से एक है गुर्दा होता है. गुर्दा यानी किडनी जो शरीर के अन्य अंगों की तरह बेहद अहम और नाज़ुक होती हैं, इसके असन्तुलित हो जाने से पूरे शरीर की स्थिति बिगड़ जाती है, इसलिए इनका खास ध्यान रखने की जरूरत होती है. आज के दौर में जैसे जैसे उन्नति होती जा रही है वैसे-वैसे किडनी रोग से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. जबकि बहुत सी छोटी-छोटी बातों को अपनाकर किडनी खराब होने के लक्षण या किडनी की बीमारी से बचाव कर सकते है. किडनी इंसान की मुट्ठी के साइज की होती हैं. यह रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ पाई जाती हैं. किडनी स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनका सबसे महत्वपूर्ण काम खून को फ़िल्टर करके उसमें से खराब पदार्थों को यूरिन के रूप में शरीर से बाहर निकालना होता है और शारीरिक संतुलन बनाए रखना होता है. किडनी खून को साफ़ करके और उसमें से खराब पदार्थ , क्रियेटिनिन, यूरिया, पोटैशियम, जहरीले पदार्थ और आवश्यकता से अधिक पानी को ब..

किडनी खराब होने के लक्षण और आयुर्वेदिक जडी बुटी से उपचार

शरीर के कुछ अंग बहुत ही अहम होते हैं क्योंकि उनसे ही पूरे शरीर का सिस्टम सुचारू रूप से चलता है जिनमे से एक है गुर्दा होता है. गुर्दा यानी किडनी जो शरीर के अन्य अंगों की तरह बेहद अहम और नाज़ुक होती हैं, इसके असन्तुलित हो जाने से पूरे शरीर की स्थिति बिगड़ जाती है, इसलिए इनका खास ध्यान रखने की जरूरत होती है. आज के दौर में जैसे जैसे उन्नति होती जा रही है वैसे-वैसे किडनी रोग से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. जबकि बहुत सी छोटी-छोटी बातों को अपनाकर किडनी खराब होने के लक्षण या किडनी की बीमारी से बचाव कर सकते है.

किडनी इंसान की मुट्ठी के साइज की होती हैं. यह रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ पाई जाती हैं. किडनी स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनका सबसे महत्वपूर्ण काम खून को फ़िल्टर करके उसमें से खराब पदार्थों को यूरिन के रूप में शरीर से बाहर निकालना होता है और शारीरिक संतुलन बनाए रखना होता है. किडनी खून को साफ़ करके और उसमें से खराब पदार्थ , क्रियेटिनिन, यूरिया, पोटैशियम, जहरीले पदार्थ और आवश्यकता से अधिक पानी को बाहर कर देता है. जब किडनी खून में उपलब्ध अधिक पानी को बाहर नहीं निकाल पाते हैं, तो उसकी वज़ह से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है तथा हृदय को अधिक काम करना पड़ जाता है.

किडनी से तीन हार्मोन रेनिन, ऐरिथ्रोपोयटिन और कैल्सिट्रियाल निकलते हैं. रक्तचाप सामान्य होने पर रेनिन का स्राव होता है. ऐरिथ्रोपोयटिन खून के तत्वो को प्रेरित करता है, यह खून बनाने के लिए अति आवश्यक होते है. कैल्स्ट्रियाल हड्डियों में कैल्सियम तथा रासायनिक संतुलन बनाए रखती है. अगर ऐसा न हो, तो समझ जाए यह किडनी खराब होने के लक्षण हो सकते है. ऐसे में सामान्य रूप से वह 24 घंटे में से 1 से 2 लीटर जितना मूत्र बनाकर शरीर को निरोग रखता है. किसी वजह से यदि एक किडनी कार्य करना बंद कर दे अथवा दुर्घटना में खो देना पड़े तो उस व्यक्ति की दूसरी किडनी पूरा कार्य सँभालती है एवं शरीर को कमज़ोर होने से बचाकर स्वस्थ रखती है.

किडनी फेलियर क्या है

शरीर मे किडनी का मुख्य कार्य शुद्धिकरण का होता है. लेकिन शरीर में किसी रोग की वजह से जब दोनों किडनी अपना सामान्य कार्य करने मे अक्षम हो जाते हैं तो इस स्थिति को हम किडनी फेलियर कहते हैं.

कैसे जानें किडनी खराब होने के लक्षण

खून मे क्रिएट्नीन और यूरिया की मात्रा की जांच से किडनी की कार्यक्षमता का पता किया जा सकता है. वैसे तो किडनी की क्षमता शरीर की आवश्यकता से ज्यादा होती है इसलिए किडनी को थोड़ा नुकसान हो भी जाए, तो भी खून की जाँच मे कोई खराबी देखने को नहीं मिलती है. जब रोग के कारण किडनी 50 प्रतिशत से ज्यादा खराब हो जाती तभी खून की जांच मे यूरिया और क्रिएट्नीन की बढ़ी हुई मात्रा का प्रदर्शन होता है, जो किडनी खराब होने के लक्षणों में प्रमुख है.

किडनी का विशेष संबंध हृदय, फेफड़ों, लिवर एवं प्लीहा के साथ होता है. ज्यादातर हृदय एवं किडनी परस्पर सहयोग के साथ कार्य करते हैं. इसलिए जब किसी को हृदयरोग होता है तो उसके किडनी खराब होने के लक्षण दिखते है, तब उस व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और वह रोगी धीरे-धीरे कमज़ोर भी हो जाता है. किडनी के रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है. इसका मुख्य कारण हमारे द्वारा हृदय रोग, दमा, श्वास, टीबी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसे रोगों में किया जा रहा अंग्रेजी दवाओं का लम्बे समय तक अथवा आजीवन इस्तेमाल है.

किडनी खराब करने वाली आदतें

पेशाब आने पर करने न जाने से किडनी खराब हो सकती है.

पानी कम मात्रा में पीने से किडनी को खतरा रहता है.

बहुत ज्यादा नमक खाने से भी किडनी खराब हो सकती है.

यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर है और अगर आप उसके ईलाज मे लापरवाही करते है तो उसका सीधा असर आपकी किडनी पर होता है.

शुगर के ईलाज मे लापरवाही करने से भी किडनी पर असर होता है.

अधिक मात्रा में मांस खाने से किडनी कमज़ोर हो सकती है.

दर्द नाशक दवाएं लगातार लेना किडनी के लिए बेहद हानिकारक होता है.

ज्यादा शराब पीने से लिवर के साथ साथ किडनी भी खराब होने लगती है.

काम के बाद जरूरी मात्रा मे आराम नहीं करने से किडनी पर बुरा असर पड़ता है.

अधिक मात्रा में साफ्ट ड्रिंक्स और सोडा पीने से आपकी किडनी फेल हो सकती है.

किडनी फेलियर के लक्षण

यदि आपको लगातार उल्टी हो रही हो तो आपकी किडनी खराब हो सकती है.

भूख न लगाना किडनी खराब होने के लक्षणों में से मुख्य है.

थकावट और कमजोरी महसूस होना भी किडनी के कमजोर होने का संकेत देती है.

यदि आपको नींद न आने की परेशानी लगातार होना.

पेशाब की मात्रा कम हो जाना भी किडनी खराब होने के लक्षण देती है.

दिमाग ठीक से काम नहीं करना या कुछ समझने में मुश्किल का सामना करना भी किडनी की कमज़ोरी का संकेत है.

मांसपेशयों मे खिंचाव और आक्षेप आना किडनी खराब होने का एक संकेत है.

पैरों और टखने मे सूजन आना भी किडनी कमज़ोर होने का लक्षण है.

लगातार खुजली होने की समस्या को आप किडनी के कमजोर होने का लक्षण समझिए.

हार्ट मे पानी जमा होने पर छाती मे दर्द होना आपकी किडनी खराब होने के लक्षण है.

हाई ब्ल प्रेशर जिसे कट्रोल करना कठिन हो तो समझ लीजिए आपकी किडनी कमज़ोर हो सकती है.

जैसा कि आप ऊपर बताई गई बातों से किडनी की अहमियत तो समझ ही गए होंगे. इसलिए किडनी से संबंधित बातों में कभी लापरवाही ना करें और अगर आपको किडनी की परेशानी महसूस हो तो बिना किसी देरी के घरेलू नुस्खों, जीवनशैली में बदलाव लाकर और चिकित्सक से संपर्क करके अपनी किडनी हेल्थ का ध्यान रख सकते है अथवा किडनी खराब होने के लक्षण या फेल होने के बाद पूरे शरीर का संतुलन काबू के बाहर हो जाता है जिससे जीवन हानि का खतरा बन जाता है.

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