🙏!! प्रकृति संतुलन मांगती है !!🙏

किडनी खराब होने के लक्षण और उपचार
April 15, 2019

🙏!! प्रकृति संतुलन मांगती है !!🙏

हेनरी फोर्ड ने अपने संस्मरण में लिखवाया है कि मैं भी एक पागल हूं। क्योंकि जब एयरकंडीशनिंग आई, तो मैंने अपने सब भवन एयरकंडीशन कर दिए। कार भी एयरकंडीशन हो गई। अपने एयरकंडीशन भवन से निकलकर मैं अपनी पोर्च में अपनी एयरकंडीशन कार में बैठ जाता हूं। फिर तो बाद में उसने अपना पोर्च भी एयरकंडीशन करवा लिया। कार निकलेगी, तब आटोमेटिक दरवाजा खुल जाएगा। कार जाएगी, दरवाजा बंद हो जाएगा। फिर इसी तरह वह अपने एयरकंडीशंड पोर्च में दफ्तर के पहुंच जाएगा। फिर उतरकर एयरकंडीशंड दफ्तर में चला जाएगा। फिर उसको तकलीफ शुरू हुई। तो डाक्टरों से उसने पूछा कि क्या करें? तो उन्होंने कहा कि आप रोज सुबह एक घंटा और रोज शाम एक घंटा काफी गरम पानी के टब में पड़े रहें। गरम पानी के टब में पड़े रहने से हेनरी फोर्ड ने लिखा है कि मेरा स्वास्थ्य बिलकुल ठीक हो गया। क्योंकि एक घंटे सुबह मुझे पसीना-पसीना हो जाता, शाम को भी पसीना-पसीना हो जाता। लेकिन तब मुझे पता चला कि मैं यह कर क्या रहा हूं! दिनभर पसीना बचाता हूं, तो फिर दो घंटे में इंटेंसली पसीने को निकालना पड़ता है, तब संतुलन हो पाता है। प्रकृति पूरे वक्त संतुलन मांगेगी। तो जो लोग बहुत व..

हेनरी फोर्ड ने अपने संस्मरण में लिखवाया है कि
मैं भी एक पागल हूं।
क्योंकि जब एयरकंडीशनिंग आई,
तो मैंने अपने सब भवन एयरकंडीशन कर दिए।
कार भी एयरकंडीशन हो गई।
अपने एयरकंडीशन भवन से निकलकर
मैं अपनी पोर्च में अपनी एयरकंडीशन
कार में बैठ जाता हूं।
फिर तो बाद में उसने अपना
पोर्च भी एयरकंडीशन करवा लिया।
कार निकलेगी,
तब आटोमेटिक दरवाजा खुल जाएगा।
कार जाएगी, दरवाजा बंद हो जाएगा।
फिर इसी तरह वह अपने एयरकंडीशंड
पोर्च में दफ्तर के पहुंच जाएगा।
फिर उतरकर एयरकंडीशंड
दफ्तर में चला जाएगा।
फिर उसको तकलीफ शुरू हुई।
तो डाक्टरों से उसने पूछा कि क्या करें?
तो उन्होंने कहा कि आप रोज सुबह एक घंटा
और रोज शाम एक घंटा काफी
गरम पानी के टब में पड़े रहें।
गरम पानी के टब में पड़े रहने से
हेनरी फोर्ड ने लिखा है कि
मेरा स्वास्थ्य बिलकुल ठीक हो गया।
क्योंकि एक घंटे सुबह मुझे
पसीना-पसीना हो जाता,
शाम को भी पसीना-पसीना हो जाता।
लेकिन तब मुझे पता चला कि
मैं यह कर क्या रहा हूं!
दिनभर पसीना बचाता हूं,
तो फिर दो घंटे में इंटेंसली पसीने
को निकालना पड़ता है,
तब संतुलन हो पाता है।
प्रकृति पूरे वक्त संतुलन मांगेगी।
तो जो लोग बहुत विश्राम में हैं,
उन्हें श्रम करना पड़ेगा।
जो लोग बहुत श्रम में हैं,
उन्हें विश्राम करना पड़ेगा।
और जो व्यक्ति भी इस
संतुलन से चूक जाएगा,
ध्यान तो बहुत दूर की बात है,
वह जीवन के साधारण सुख
से भी चूक जाएगा।
ध्यान का आनंद तो बहुत दूर है,
वह जीवन के साधारण जो
सुख मिल सकते हैं,
उनसे भी वंचित रह जाएगा।

# गीतादर्शन ✍

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