April 1, 2019

‘हींग का पानी’ पीने के असरदार फायदे

‘हींग का पानी’ पीने के ऐसे असरदार फायदे जो आपने कभी नहीं सुने होंगे 1. कब्ज की शिकायत होने पर हींग का प्रयोग लाभ देगा। रात को सोने से पहले हींग के चूर्ण को पानी में मिलाकर पिएं और सुबह देखें असर। सुबह पेट पूरी तरह से साफ हो जाएगा। 2. अगर भूख नहीं लगती या भूख लगना कम हो गया है, तो भोजन करने से पहले हींग को घी में भूनकर अदरक और मक्खन के साथ लेने से फायदा होगा और भूख खुलकर लगेगी। 3. त्वचा में कांच, कांटा या कोई नुकीली चीज चुभ जाए और निकालने में परेशानी आ रही हो, तो उस स्थान पर हींग का पानी या लेप लगाएं। चुभी हुई चीज अपने आप ही बाहर निकल आएगी। 4. अगर कान में दर्द हो रहा हो, तो तिल के तेल में हींग को गर्म करके, उस तेल की एक-दो बूंद कान में डालने से कान का दर्द पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। 5. दांतों में कैविटी होने पर भी हींग आपके लिए काम की चीज साबित हो सकता है। अगर दांतों में कीड़े हैं, तो रात को दांतों में हींग लगाकर या दबा कर सो जाएं। कीड़े अपने आप निकल आएंगे। Advertisements
April 1, 2019

पुराने समय की कहावत

पुराने समय की कहावत है – – – 🌷 चैते गुड़, वैसाखे तेल । जेठ के पंथ¹, अषाढ़े बेल ।। सावन साग, भादौ दही²। कुवांर करेला, कार्तिक मही³ ।। अगहन जीरा,पूसै धना। माघे मिश्री, फागुन चना।। जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहीं धरै।।।। 🌾 किस माह में क्या न खाएँ- 🌾 आवश्यक निर्देश – 🌷 चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं। 🌷 बैसाख माह में नया तेल न लगाएं। 🌷 जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए। 🌷 आषाढ़ माह में पका बेल न खाएं। 🌷 सावन माह में साग न खाएं। 🌷 भादों माह में दही न खाएं। 🌷 क्वार माह में करेला न खाएं। 🌷 कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं। 🌷 अगहन माह में जीरा न खाएं। 🌷 पूस माह में धनिया न खाएं। 🌷 माघ माह में मिश्री न खाएं। 🌷 फागुन माह में चना न खाएं। 🌾अन्य निर्देश- ○स्नान के पहले और भोजन के बाद पेशाब जरूर करें। ○भोजन के बाद कुछ देर बायी करवट लेटना चाहिये। ○रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठाना चाहिये। ○प्रातः पानी पीकर ही शौच के लिए जाना चाहिये। ○सूर्योदय के पूर्व गाय का धारोष्ण दूध पीना चाहिये व्यायाम के बाद दूध अवश्य पियें। ○मल,मूत्र,छीक का वेग नही रोकना चाहिये। ○ऋतु (मौसमी) फल ख..
March 28, 2019

Twenty four Rishis Meters Devatâs of Gayatri Mantra Details.

Gayatri Mantra is the ultimate among mantras. Gayatri is a Meter, Chandas. Gayatri is the Mother of All Mantras. Smritis declare that no mantra will yield results for one who does not chant Gayatri. Gayatri Mantra was revealed through Sage Viswamitra. People of three dispositions ,Brahmana, Kshatriya and Vaisya are enjoined to Chant it as a part of Sandhya Vandhana , thrice a day. Sandhya Vandhana has the following components, apart from routine rituals like Aachamana and Pranayama. They are, 1.Purification of Speech,Body and Mind. 2.Obesiance to water and purification by it. 3.Thanksgiving to Ten planets and ancestors. 4.Atoning one’s impure actions( by speech, body and mind) 5.Worship of The Sun. 6.Chanting Gayatri. 7.Worshiping Reality ,Brahman. 8.Realising and offering Worship to Sun as the Visible Reality. 9.Offering the result of Sandhya Vandana to Reality, that is non attachment to action performed. While worshipping Sun, Sun is requested to be present. So is Gayatri. Sun is worshipped as Gayatri and Gayatri as Sun. As Gayatri is a Meter, Chandas, (Anushtup), the Anushtup is invoked. Though Gayatri was revealed through Viswamitra,he did not create or invent it. He, along with other Rishis are invoked; Viswamitra is given pride of place. Twenty four Rishis are associated with Gayatri,one Rishi for one syllable of Gayatri Mantra,totalling twenty four. Sinilarly twenty four chandas are referred to , though Gayatri is Anushtup Chandas. We mention only the following Rishis, Chandas and Devatha ,as a token, when we perform Sandhya Vandana dàily. Rishis. Atri, Bhrigu, Kutsa, Vasishta,Gautama, Kasyapa, Angirasa. Chandas. Gayatri, Ushnik Anushtup. Devatâs. Agni, Vaayu, Arga,Vaagesa, Viswe Deva. The twenty four Rishis. (1) Vâma Deva, (2) Attri, (3) Vas’istha, (4) S’ukra, (5) Kanva, (6) Parâs’ara, (7) the very fiery Vis’vamitra, (8) Kapila, (9) S’aunaka, (10) Yâjñavalkya, (11) Bharadvâja, (12) the ascetic Jamadagni, (13) Gautama, (14) Mudgala, (15) Vedavyâsa, (16) Lomas’a, (17) Agastya, (18) Kaus’ika, (19) Vatsya, (20) Pulastya, (21) Mânduka, (22) the ascetic in chief Durvâsâ, (23) Nârada and (24) Kas’yapa. The Chandas, in order. – (1) Gâyatrî, (2) Usnik, (3) Anustup, (4) Brihatî, (5) Pankti, (6) Trisnup, (7) Jagatî, (8) Atijagatî, (9) S’akkarî, (10) Ati S’akkarî, (11) Dhriti, (12) Ati Dhriti, (13) Virât, (14) Prastârapankti, (15) Kriti, (16) Prâkriti, (17) Âkriti, (18) Vikriti, (19) Samkriti, (20) Aksarapankti, (21) Bhuh, (22) Bhuvah, (23) Svah and (24) Jyotismatî. The Devatâs of the several letters in due order, are :– (1) Agni, (2) Prajâpati, (3) Soma, (4) Îs’âna, (5) Savitâ, (6) Âditya, (7) Brihaspati, (8) Maitrâvaruna, (9) Bhagadeva, (10) Aryamâ, (11) Ganes’a, (12) Tvastrâ, (13) Pûsâ, (14) Indrâgnî, (l5) Vâyu, (16) Vâmadeva, (17) Maitrâ varunî (18) Vis’vadeva, (19) Mâtrikâ, (20) Visnu, (21) Vasu, (22) Rudra Deva, (23) Kuvera, and (24) the twin As’vinî Kumâras. Reference and citation. first Chapter of the Tw..
March 28, 2019

विज्ञान भैरव तंत्र विधि–103 (ओशो)

दूसरी विधि: अपनी संपूर्ण चेतना से कामना के, जानने के आरंभ में ही जानो। इस विधि के संबंध में मूल बात है ‘संपूर्ण चेतना’। यदि तुम किसी भी चीज पर अपनी संपूर्ण चेतना लगा दो तो वह एक रूपांतरणकारी शक्‍ति बन जाएगी। जब भी तुम संपूर्ण होते हो, किसी चीज में भी, तभी रूपांतरण होता है। लेकिन यह कठिन है। क्‍योंकि हम जहां भी है, बस आंशिक ही है। समग्रता में नहीं है। यहां तुम मुझे सुन रहे हो। यह सुनना ही रूपांतरण हो सकता है। यदि तुम समग्रता से सुनो, इस क्षण में अभी और यहीं, यदि सुनना तुम्‍हारी समग्रता हो, तो वह सुनना एक ध्‍यान बन जाएगा। तुम आनंद के अलग ही आयाम में, एक दूसरी ही वास्‍तविकता में प्रवेश कर जाओगे। लेकिन तुम समग्र नहीं हो। मनुष्‍य के मन के साथ यही मुश्‍किल है, वह सदैव आंशिक ही होता है। एक हिस्‍सा सुन रहा है। बाकी हिस्‍से शायद कहीं और हो, या शायद सोए ही हुए हों, या सोच रहे हो कि क्‍या कहा जा रहा है। या भीतर विवाद कर रहे हो। उसमें एक विभाजन पैदा होता है और विभाजन से ऊर्जा का अपव्‍यय होता है। तो जब भी कुछ करो, उसमे अपने पूरे प्राण डाल दो। जब तुम कुछ भी नहीं बचाते, छोटा सा हिस्‍सा भी अलग ..
March 28, 2019

विज्ञान भैरव तंत्र विधि–104 (ओशो)

तीसरी विधि: ‘हे शक्‍ति, प्रत्‍येक आभास सीमित है, सर्वशक्‍तिमान में विलीन हो रहा है।’ जो कुछ भी हम देखते है सीमित है, जो कुछ भी हम अनुभव करते है सीमित है। सभी आभास सीमित है। लेकिन यदि तुम जाग जाओ तो हर सीमित चीज असीम में विलीन हो रही है। आकाश की और देखो। तुम केवल उसका सीमित भाग देख पाओगे। इसलिए नहीं कि आकाश सीमित है, बल्‍कि इसलिए कि तुम्‍हारी आंखें सीमित है। तुम्‍हारा अवधान सीमित है। लेकिन यदि तुम पहचान सको कि यह सीमा अवधान के कारण है, आंखों के कारण है, आकाश के सीमित होने के कारण नहीं है तो फिर तुम देखोगें कि सीमाएं असीम में विलीन हो रही है। जो कुछ भी हम देखते है वह हमारी दृष्‍टि के कारण ही सीमित हो जाता है। वरना तो अस्‍तित्‍व असीम है। वरना तो सब चीजें एक दूसरे में विलीन हो रही है। हर चीज अपनी सीमाएं खो रही है। हर क्षण लहरें महासागर में विलीन हो रही है। और न किसी को कोई अंत है, न आदि। सभी कुछ शेष सब कुछ भी है। सीमा हमारे द्वारा आरोपित की गई है। यह हमारे कारण है, क्‍योंकि हम अनंत को देख नहीं पाते, इसलिए उसको विभाजित कर देते है। ऐसा हमने हर चीज के साथ किया है। तुम अपने घर के आस-पास ब..

PAURANIK KATHA


April 1, 2019

चाय पान के हानि -लाभ

चाय चीन,जापान,लंका एव. बर्मा में प्रचुर मात्रा में उगाई जाती है | भारत में विशेषत: देहरादून, नीलगिरी, दार्जिलिंग और आसाम में चाय की खेती की जाती है| चाय का प्रभाव मृदु उत्तेजक होने से ज्ञान तंतुओं पर इसका विशेष असर पड़ता है | तृषा,माईग्रेन ,नेत्र शूल,बवासीर,शौथ,शिरोवेदना,मूत्र कष्ट,नाड़ी की अति दुर्बलता,,आँतों के रोग तथा चिरकारी वृक्क प्रदाह में चाय उपयोगी है| मस्तिष्क के लिए चाय लाभ दायक है| यह निद्रा का नाश करने वाली है | जो जागृत रहना चाहते हैं चाय उनके लिए उत्तम है| भारत में गुजरात के लोग चाय के काफी शौकीन प्रतीत होते हैं | चाय,दूध,शकर आवश्यक मात्रा में लेकर खूब उबालते हैं फिर छानकर पीते हैं | लेकिन इस प्रकार से बनाई गयी चाय शरीर और मस्तिष्क को नुक्सान पहुंचाती है | चाय बनाने का सही तरीका यह है:-पानी,दूध,शकर आवश्यक मात्रा में उबालें |जब उबाल आ जाये तब नीचे उतारलें और उसमें आवश्यक मात्रा में चाय पती डालकर पांच से १० मिनिट ढँक कर रखें| इसके बाद इसे छानने के बाद कुछ नाश्ता करें फिर शांति पूर्वक चाय पान करें | यह चाय शरीर के लिए आरोग्यप्रद है | चाय को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए पुदीना..
April 1, 2019

चाय पान के हानि -लाभ

चाय चीन,जापान,लंका एव. बर्मा में प्रचुर मात्रा में उगाई जाती है | भारत में विशेषत: देहरादून, नीलगिरी, दार्जिलिंग और आसाम में चाय की खेती की जाती है| चाय का प्रभाव मृदु उत्तेजक होने से ज्ञान तंतुओं पर इसका विशेष असर पड़ता है | तृषा,माईग्रेन ,नेत्र शूल,बवासीर,शौथ,शिरोवेदना,मूत्र कष्ट,नाड़ी की अति दुर्बलता,,आँतों के रोग तथा चिरकारी वृक्क प्रदाह में चाय उपयोगी है| मस्तिष्क के लिए चाय लाभ दायक है| यह निद्रा का नाश करने वाली है | जो जागृत रहना चाहते हैं चाय उनके लिए उत्तम है| भारत में गुजरात के लोग चाय के काफी शौकीन प्रतीत होते हैं | चाय,दूध,शकर आवश्यक मात्रा में लेकर खूब उबालते हैं फिर छानकर पीते हैं | लेकिन इस प्रकार से बनाई गयी चाय शरीर और मस्तिष्क को नुक्सान पहुंचाती है | चाय बनाने का सही तरीका यह है:-पानी,दूध,शकर आवश्यक मात्रा में उबालें |जब उबाल आ जाये तब नीचे उतारलें और उसमें आवश्यक मात्रा में चाय पती डालकर पांच से १० मिनिट ढँक कर रखें| इसके बाद इसे छानने के बाद कुछ नाश्ता करें फिर शांति पूर्वक चाय पान करें | यह चाय शरीर के लिए आरोग्यप्रद है | चाय को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए पुदीना..
April 1, 2019

मेमोरी पावर बढाती है ब्राह्मी और शंख पुष्पी

शंख पुष्पी और ब्राह्मी आयुर्वेद में ऐसी दो जड़ी बूटिया हैं जो मस्तिष्क बहुत ताकतवर बनाती है| इन दोनों जड़ी बूटियों में ऐसे तत्त्व मौजूद हैं जो मस्तिष्क के अंदर तक अपना असर डालते हैं| यही कारण है कि ये जड़ी बूटियाँ न केवल स्मरण शक्ति बढाती हैं बल्कि व्यक्ति को मानसिक रूप से बलवान भी बनाती हैं| न केवल भारत अपितु सारे विश्व में इनके ऊपर अनुसंधान कार्य चल रहे हैं| ऐसा माना जा रहा है कि ये जड़ी-बूटियाँ अल्जाईमर्स, डिमेंशिया, और पार्किन्सन जैसी बीमारियों को ठीक करने में उपयोगी होंगी| यह इसलिए कि इनमें दिमाग को ठीक करने की ताकत है| भारत में मेधा शक्ति बढाने के लिए इन जड़ी बूटियाँ का प्राचीन काल से उपयोग होता आया है| इससे नींद अच्छी आती है| मस्तिष्क में ताजगी लाती है| मस्तिष्क का तनाव कम करती हैं| ये दोनों जड़ी – बूटियाँ खोई हुई स्मरण शक्ति वापस लौटाने की ताकत रखती हैं| ब्राह्मी और शंख पुष्पी का सेवन भी बहुत आसान है|बच्चों की मेमोरी पावर बढाने के लिए सोते वक्त एक गिलास गरम दूध में एक चम्मच ब्राह्मी का चूर्ण मिलाकर लेना कर्त्तव्य है| कुछ ही महीनों में इसका असर दिखने लगेगा| ऐसे लोग जिन्हें अनिद्रा रोग..
April 1, 2019

List of Over 1000 Ancient Indian Rare Manuscripts Tokyo University

Treasures of Ancient Indian texts were transmitted orally . Later material was written in Palm leaves. This system was followed in Sanskrit, Pali,Prakrit and by regional languages like Tamil. Transfer of texts orally ensured that they were not lost by arson or destruction by Invaders. However lot of Manuscripts have found their way into Foreign Museums, Smithsonian, Gallery of Arts, UK, The Louvre , Paris, Vatican. …. Some of the materials are very rare and they contain advanced scientific thoughts and philosophy. One such collection is found in Matsunami Collection, Japan. It has over 1000 Books, with commentary and elaborate notes. They cover Veda, Tantra, Buddhism, Advanced Yoga,and Scientifique treatises. Would philanthropists or the Government restore these treasures back to India? And more treasures like, Vedic Atreya Shiksha in Tamil in GermanyVedic Atreya Shiksha in Tamil in Germany # A Palmleaf manuscript is shown as Featured Image. Siddhas Manuscripts CONTENTS Photographs of Manuscripts .Frontispiece Preface. iii Acknowledgement. v Abbreviation . vi Part I Short Descriptions of each Manuscript. 1 Part II Catalogue of the Contents. 185 Section I. Sutra . 187 Section II. Avadana. 213 Section III. Tantra. 245 Section IV. Dharanl . 287 Section V. Sastra . 350 Section VI. Non-Buddhist Work . 360 Appendix. 375 Tables of the New and Old Numbers of the Manuscripts . 377 Reference and citation. Matsunami 1965, A Catalogue Of The Sanskrit Manuscripts In The Tokyo University Library 53.808244 -1.538475