March 27, 2019

विज्ञान भैरव तंत्र विधि–105 (ओशो)

चौथी विधि ‘सत्‍य में रूप अविभक्‍त है। सर्वव्‍यापी आत्‍मा तथा तुम्‍हारा अपना रूप अविभक्‍त है। दोनों को इसी चेतना से निर्मित जानो।’ ‘सत्‍य में रूप अविभक्‍त है।’ वे विभक्‍ति दिखाई पड़ते है, लेकिन हर रूप दूसरे रूपों के साथ संबंधित है। वह दूसरों के साथ अस्‍तित्‍व में है—बल्‍कि यह कहना अधिक सही होगा कि वह दूसरे रूपों के साथ सह-अस्‍तित्‍व में है—बल्‍कि यह कहना अधिक सही होगा कि वह दूसरे रूपों के साथ सह-अस्‍तित्‍व में है। हमारी वास्‍तविकता एक सह सही अस्‍तित्‍व है। वास्‍तव में यह एक पारस्‍परिक वास्‍तविकता है। पारस्‍परिक आत्मीय ता है। उदाहरण के लिए, जरा सोचो कि तुम इस पृथ्‍वी पर अकेले हो। तुम क्‍या होओगे? पूरी मनुष्‍यता समाप्‍त हो गई हो, तीसरे विश्‍वयुद्ध के बाद तुम्‍हीं अकेले बचे हो—संसार में अकेले, इस विशाल पृथ्‍वी पर अकेले। तुम कौन होओगे? पहली बात तो यह है कि अपने अकेले होने की कल्‍पना करना ही असंभव है। मैं कहता हूं, अपने अकेले होने की कल्‍पना करना ही असंभव है। तुम बार-बार कोशिश करोगे और पाओगे कि कोई साथ ही खड़ा है—तुम्‍हारी पत्‍नी, तुम्‍हारे बच्‍चे, तुम्‍हारे मित्र—क्‍योंकि तुम कल्‍पना ..
March 27, 2019

विज्ञान भैरव तंत्र विधि–106 (ओशो)

पहली विधि: ‘हर मनुष्‍य की चेतना को अपनी ही चेतना जानो। अंत: आत्‍मचिंता को त्‍यागकर प्रत्‍येक प्राणी हो जाओ।’ ‘हर मनुष्‍य की चेतना को अपनी ही चेतना जानो।’ वास्‍तव में ऐसा ही है, पर ऐसा लगता नहीं। अपनी चेतना को तुम अपनी चेतना ही समझते हो। और दूसरों की चेतना को तुम कभी अनुभव नहीं करते। अधिक से अधिक तुम यही सोचते हो कि दूसरे भी चेतन है। ऐसा तुम इसीलिए सोचते हो क्‍योंकि जब तुम चेतन हो तो तुम्‍हारे ही जैसे दूसरे प्राणी भी चेतन होने चाहिए। यह एक तार्किक निष्कर्ष है; तुम्‍हें लगता नहीं कि वे चेतन है। यह ऐसे ही है जैसे जब तुम्‍हें सिर में दर्द होता है तो तुम्‍हें उसका पता चलता है, तुम्‍हें उसका अनुभव होता है। लेकिन यदि किसी दूसरे के सिर में दर्द है तो तुम केवल सोचते हो, दूसरे के सिर-दर्द को तुम अनुभव नहीं कर सकते। तुम केवल सोचते हो कि वह जो कह रहा है सच ही होना चाहिए। और उसे तुम्‍हारे सिर-दर्द जैसा ही कुछ हो रहा होगा। लेकिन तुम उसे अनुभव नहीं कर सकते। अनुभव केवल तभी आ सकता है जब तुम दूसरों कि चेतना के प्रति भी जागरूक हो जाओ, अन्‍यथा यह केवल तार्किक निष्‍पति मात्र ही रहेगी। तुम विश्‍वास कर..
March 27, 2019

विज्ञान भैरव तंत्र विधि–107 (ओशो)

दूसरी विधि: ‘यह चेतना ही प्रत्‍येक प्राणी के रूप में है। अन्‍य कुछ भी नहीं है।’ अतीत में वैज्ञानिक कहा करते थे कि केवल पदार्थ ही है और कुछ भी नहीं है। केवल पदार्थ के ही होने की धारणा पर बड़े-बड़े दर्शन के सिद्धांत पैदा हुए। लेकिन जिन लोगों की यह मान्‍यता थी कि केवल पदार्थ ही है वे भी सोचते थे कि चेतना जैसा भी कुछ है। तब वह क्‍या था? वे कहते थे कि चेतना पदार्थ का ही एक बाई-प्रोडेक्ट है, एक उप-उत्‍पाद है। वह परोक्ष रूप में, सूक्ष्‍म रूप में पदार्थ ही था। लेकिन इस आधी सदी ने एक महान चमत्‍कार होते देखा है। वैज्ञानिकों ने यह जानने का बहुत प्रयास किया कि पदार्थ क्‍या है। लेकिन जितना उन्‍होंने प्रयास किया उतना ही उन्‍हें लगा कि पदार्थ जैसा तो कुछ भी नहीं है। पदार्थ का विश्‍लेषण किया गया और पाया कि वहां कुछ नहीं है। अभी सौ वर्ष पूर्व नीत्‍शे ने कहा था कि परमात्‍मा मर गया है। परमात्‍मा के मरने के साथ ही चेतना भी बच नहीं सकती क्‍योंकि परमात्‍मा का अर्थ है समग्र-चेतना। लेकिन इन सौ सालों में ही पदार्थ मर गया। और पदार्थ इसलिए नहीं मरा क्‍योंकि धार्मिक लोग ऐसा सोचते है, बल्‍कि वैज्ञानिक एक बिल..
March 27, 2019

विज्ञान भैरव तंत्र विधि–108 (ओशो)

तीसरी विधि: ‘यह चेतना ही प्रत्‍येक की मार्ग दर्शक सत्ता है, यही हो रहो।’ पहली बात, मार्गदर्शक तुम्‍हारे भीतर है, पर तुम उसका उपयोग नहीं करते। और इतने समय से, इतने जन्‍मों से तुमने उसका उपयोग नहीं किया है। कि तुम्‍हें पता ही नहीं है कि तुम्‍हारे भीतर कोई विवेक भी है। मैं कास्‍तानेद की पुस्‍तक पढ़ रहा था। उसका गुरु डान जुआन उसे एक सुंदर सा प्रयोग करने के लिए देता है। यह प्राचीनतम प्रयोगों में से एक है। एक अंधेरी रात में, पहाड़ी रास्‍ते पर कास्‍तानेद का गुरु कहता है, तू भीतरी मार्गदर्शक पर भरोसा करके दौड़ना शुरू कर दे। यह खतरनाक था। यह खतरनाक था। पहाड़ी रास्‍ता था। अंजान था। वृक्षों झाड़ियों से भरा था। खाइयां भी थी। वह कहीं भी गिर सकता था। वहां तो दिन में भी संभल-संभलकर चलना पड़ता था। और यह तो अंधेरी रात थी। उसे कुछ सुझाई नहीं पड़ता था। और उसका गुरू बोला, चल मत दौड़। उसे तो भरोसा ही न आया। यह तो आत्‍महत्‍या करने जैसा हो गया। वह डर गया। लेकिन गुरु दौड़ा। वह बिलकुल वन्‍य प्राणी की तरह दौड़ता हुआ गया और वापस आ गया। और कास्‍तानेद को समझ नहीं आया कि वह कैसे दौड़ रहा था। और न केवल वह दौड़..
March 27, 2019

विज्ञान भैरव तंत्र विधि–109 (ओशो)

पहली विधि: अपने निष्‍क्रिय रूप को त्‍वचा की दीवारों का एक रिक्‍त कक्ष मानो—सर्वथा रिक्‍त। अपने निष्‍क्रिय रूप को त्‍वचा की दीवारों का एक रिक्‍त कक्ष मानो—लेकिन भीतर सब कुछ रिक्‍त हो। यह सुंदरतम विधियों में से एक है। किसी भी ध्‍यानपूर्ण मुद्रा में, अकेले, शांत होकर बैठ जाओ। तुम्‍हारी रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और पूरा शरीर विश्रांत, जैसे कि सारा शरीर रीढ़ की हड्डी पर टंगा हो। फिर अपनी आंखें बंद कर लो। कुछ क्षण के लिए विश्रांत, से विश्रांत अनुभव करते चले जाओ। लयवद्ध होने के लिए कुछ क्षण ऐसा करो। और फिर अचानक अनुभव करो कि तुम्‍हारा शरीर त्‍वचा की दीवारें मात्र है और भीतर कुछ भी नहीं है। घर खाली है, भीतर कोई नहीं है। एक बार तुम विचारों को गुजरते हुए देखोंगे, विचारों के मेघों को विचरते पाओगे। लेकिन ऐसा मत सोचो कि वे तुम्‍हारे है। तुम हो ही नहीं। बस ऐसा सोचो कि वे रिक्‍त आकाश में घूम हुए आधारहीन मेध है, वे तुम्‍हारे नहीं है। वे किसी के भी नहीं है। उनकी कोई जड़ नहीं है। वास्‍तव में ऐसा ही है: विचार केवल आकाश में धूमते मेघों के समान है। न तो उनकी कोई जड़ें है, न आकाश से उनका कोई संबंध है। वे ..

PAURANIK KATHA


April 1, 2019

तेज याददाश्त :- चीजें जिन्हें खाने से दिमाग बहुत तेज चलने लगता है

बार-बार भूलने की समस्या बहुत ही परेशानी देने वाली होती है। जिन लोगों के साथ ये समस्या होती है सिर्फ वे खुद ही नहीं उनसे जुड़े अन्य लोग भी कई बार समस्या में पड़ जाते है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ कई लोगों की याददाश्त कमजोर होने लगती है। किसी भी चीज को ढ़ूंढने या काम को याद रखने के लिए दिमाग पर जोर डालना पड़ता है। नीचे लिखी चीजों को अपने आहार में शामिल करें और पाएं गजब की याददाश्त। • ब्राह्मी- ब्राह्मी का रस या चूर्ण पानी या मिश्री के साथ लेने से याददाश्त तेज होती है। ब्राह्मी के तेल की मालिश से दिमागी कमजोरी, खुश्की दूर होती है। • फल- लाल और नीले रंगों के फलों का सेवन भी याद्दाशत बढ़ाने में याददाश्त बढ़ाने में मददगार होते हैं जैसे सेब और ब्लूबेरी खाने से भूलने की बीमारी दूर होती है। • सब्जियां- बैंगन का प्रयोग करें। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व दिमाग के टिशू को स्वस्थ्य रखने में मददगार होते हैं। चुकंदर और प्याज भी दिमाग बढ़ाने में अनोखा काम करते हैं। • गेहूं – गेहूं के जवारे का जूस पीने से याददाश्त बढ़ती है। गेहूं से बने हरीरा में शक्कर और बादाम मिलाकर पीने से भी स्मरण शक्ति बढ़ती है। • अखरोट – अ..
April 1, 2019

‘हींग का पानी’ पीने के असरदार फायदे

‘हींग का पानी’ पीने के ऐसे असरदार फायदे जो आपने कभी नहीं सुने होंगे 1. कब्ज की शिकायत होने पर हींग का प्रयोग लाभ देगा। रात को सोने से पहले हींग के चूर्ण को पानी में मिलाकर पिएं और सुबह देखें असर। सुबह पेट पूरी तरह से साफ हो जाएगा। 2. अगर भूख नहीं लगती या भूख लगना कम हो गया है, तो भोजन करने से पहले हींग को घी में भूनकर अदरक और मक्खन के साथ लेने से फायदा होगा और भूख खुलकर लगेगी। 3. त्वचा में कांच, कांटा या कोई नुकीली चीज चुभ जाए और निकालने में परेशानी आ रही हो, तो उस स्थान पर हींग का पानी या लेप लगाएं। चुभी हुई चीज अपने आप ही बाहर निकल आएगी। 4. अगर कान में दर्द हो रहा हो, तो तिल के तेल में हींग को गर्म करके, उस तेल की एक-दो बूंद कान में डालने से कान का दर्द पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। 5. दांतों में कैविटी होने पर भी हींग आपके लिए काम की चीज साबित हो सकता है। अगर दांतों में कीड़े हैं, तो रात को दांतों में हींग लगाकर या दबा कर सो जाएं। कीड़े अपने आप निकल आएंगे। Advertisements
April 1, 2019

पुराने समय की कहावत

पुराने समय की कहावत है – – – 🌷 चैते गुड़, वैसाखे तेल । जेठ के पंथ¹, अषाढ़े बेल ।। सावन साग, भादौ दही²। कुवांर करेला, कार्तिक मही³ ।। अगहन जीरा,पूसै धना। माघे मिश्री, फागुन चना।। जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहीं धरै।।।। 🌾 किस माह में क्या न खाएँ- 🌾 आवश्यक निर्देश – 🌷 चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं। 🌷 बैसाख माह में नया तेल न लगाएं। 🌷 जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए। 🌷 आषाढ़ माह में पका बेल न खाएं। 🌷 सावन माह में साग न खाएं। 🌷 भादों माह में दही न खाएं। 🌷 क्वार माह में करेला न खाएं। 🌷 कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं। 🌷 अगहन माह में जीरा न खाएं। 🌷 पूस माह में धनिया न खाएं। 🌷 माघ माह में मिश्री न खाएं। 🌷 फागुन माह में चना न खाएं। 🌾अन्य निर्देश- ○स्नान के पहले और भोजन के बाद पेशाब जरूर करें। ○भोजन के बाद कुछ देर बायी करवट लेटना चाहिये। ○रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठाना चाहिये। ○प्रातः पानी पीकर ही शौच के लिए जाना चाहिये। ○सूर्योदय के पूर्व गाय का धारोष्ण दूध पीना चाहिये व्यायाम के बाद दूध अवश्य पियें। ○मल,मूत्र,छीक का वेग नही रोकना चाहिये। ○ऋतु (मौसमी) फल ख..
March 30, 2019

👂 कान के रोग

👂कान के रोग 🎼🎼 🔆कान में पीब(मवाद) होने परः 🔅पहला प्रयोगः फुलाये हुए सुहागे को पीसकर कान में डालकर ऊपर से नींबू के रस की बूँद डालने से मवाद निकलना बंद होता है। मवाद यदि सर्दी से है तो सर्दी मिटाने के उपाय करें। साथ में सारिवादी वटी 1 से 3 गोली दिन में दो बार व त्रिफला गुग्गल 1 से 3 गोली दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए। 🔅दूसरा प्रयोगः शुद्ध सरसों या तिल के तेल में लहसुन की कलियों को पकाकर 1-2 बूँद सुबह-शाम कान में डालने से फायदा होता है। ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ 🔆बहरापनः 🔅पहला प्रयोगः दशमूल, अखरोट अथवा कड़वी बादाम के तेल की बूँदें कान में डालने से बहरेपन में लाभ होता है। 🔅दूसरा प्रयोगः ताजे गोमूत्र में एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर हर रोज कान में डालने से आठ दिनों में ही बहरेपन में फायदा होता है। 🔅तीसरा प्रयोगः आकड़े के पके हुए पीले पत्ते को साफ करके उस पर सरसों का तेल लगाकर गर्म करके उसका रस निकालकर दो-तीन बूँद हररोज सुबह-शाम कान में डालने से बहरेपन में फायदा होता है। 🔅चौथा प्रयोगः करेले के बीज और उतना ही काला जीरा मिलाकर पानी में पीसकर उसका रस दो-तीन बूँद दिन में दो बार कान में डालने से बहरेपन म..