March 27, 2019

दादी माँ के 30 घरेलू उपाय

दादी माँ के घरेलू उपाय दादी माँ के घरेलू उपाय : कोई भी बीमारी हो उसके लिये सबसे बेहतर घरेलू नुस्‍खे ही रहते हैं। चाहे तो सिर में दर्द हो या फिर हाई बीपी की समस्‍या हो, घर की रसोई में रखे मसाले हर वक्‍त काम आ जाते हैं। आज कल बहुत ही कम लोग हैं जो घरेलू नुस्‍खे आजमाते हैं मगर दोस्‍तों अगर पुराने जमाने की बात की जाए तो हमारी दादी – नानी इन्‍हीं के भरोसे अपनी पूरी जिंदगी काट लेती थीं। 1. मासिक धर्म (Periods) में दर्द से छुटकारा पाना के लिए ठंडे पानी में दो-तीन नींबू निचोड़ कर पिये। 2. तेज सिरर्दर्द से छुटकारा पाने के लिए सेब को छिल कर बारीक काटें। उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर सुबह खाली पेट खाएं। 3. शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता हैं। 4. शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता हैं। 5. मक्खन में थोड़ा सा केसर मिलाकर रोजाना लगाने से काले होंठ भी गुलाबी होने लगते हैं। 6. मुंह क..
March 26, 2019

Egypt Named After Ramas Grandfather Aja Ikshvaku Dynasty

I have, through this blog, been trying to trace the origin of various civilizations , from 2009. I am on always on the look out for new information on world civilizations. When one checks the history of A people or a culture, one tends to stop at the last information. For instance, if one wants to know the Civilizations of Greece, Assyria, Sumeria or Akkadian in thecwestern hemisphere one should seek further information on how these civilization had come into being. How did their culture evolve? What was happening around the world at that time? Whom did they conquer? Who conquered them? Are there mentions of these civilizations in other contemporary cultures? What were their relations with other countries? If one takes time to check all these, one may be able to find resonably accurate data. I have written on the Jews origins to Indian Vedic Tribes, Lakshmi was worshipped as a Cannanite Goddess, Pillars of Hercules were dedicated to Balarama, Krishna,Dinosiyus was Lord Shiva, Dome of the Rock was Krishna temple…… The Egyptian civilization has its roots in India. Hindu thoughts are found in Greece much before Alexander’s Information of India. Greek philosophy is much closer to, seems to have been inspired by ,Santana Dharma/Hinduism. The Greeks seem to have had trade relations with Tamils of India , probably earlier to the time they had with North India. I shall be attempting to trace the History of Egypt, its culture, Religion,Philosophy and their Pharaohs. Secular Historians may wait till I complete the series, this series may take four to five articles, before jumping the gun. Let me start with the name Egypt. ‘The English name “Egypt” is derived from the Ancient Greek “Aígyptos” (“Αἴγυπτος”), via Middle French “Egypte” and Latin “Aegyptus”. It is reflected in early Greek Linear B tablets as “a-ku-pi-ti-yo”. The adjective “aigýpti-“/”aigýptios” was borrowed into Coptic as “gyptios”, and from there into Arabic as “qubṭī”, back formed into “قبط” (“qubṭ”), whence English “Copt”. The Greek forms were borrowed from Late Egyptian (Amarna) Hikuptah “Memphis”, a corruption of the earlier Egyptian name.. (⟨ḥwt-kȝ-ptḥ⟩), meaning “home of the ka (soul) of Ptah”, the name of a temple to the god Ptah at Memphis.[17]” As I have written earlier on the history of Africa and Middle East, present history makes one to believe that there was only tribalism in Africa before the advent of Christianity and The middle East was a den of Nomads with no noticeable culture worth the mention before the Prophet. A close study of these continnt, countries shall reveal an illustrious past of great civilizations. Egypt derives its name from Ajaps. Earlier civilizations knew of the Solar Dynasty of India Lord Rama belongs to this dynasty. Rama’s Empire Covered the world. Rama went to War with Atlantis One can find the references to Rama in the middle east. For Example Rama Chapel in Ur. Rama ruled Mesapotamia for Sixty years Areas nearby abound w..
March 26, 2019

Bawaseer / बवासीर : Piles Treatment In Hindi । बवासीर का इलाज

Bawaseer / बवासीर : Piles treatment at home in hindi – बवासीर का इलाजContents 1 Bawaseer / बवासीर : Piles treatment at home in hindi – बवासीर का इलाज1.1 बवासीर के कारण Piles causes in hindi1.2 बवासीर के लक्षण Piles (Hemorrhoids) symptoms in hindi1.3 बवासीर का घरेलू इलाज Piles treatment in hindi; Home remedies of piles Bawaseer / Bawasir (बवासीर) : पेट की बीमारियों का सीधा संबंध हमारे खान पान से जुड़ा होता है बवासीर की वजह से याददाशत भी जा सकती है. Bawaseer के सबसे ज्यादा मरीज विदेशो में पाए जाते है बवासीर को ठीक करने के लिए दवाओं से लेकर ऑपरेशन तक की सुविधाएँ उपलब्ध है लेकिन बहुत ही कम लोग जानते है कि घरेलू नुस्खों को अपनाकर भी इससे छुटकारा पाया जा सकता हैं। बवासीर के कारण Piles causes in hindi बवासीर का प्रमुख कारण पेट की खराबी व पाचन तंत्र में गड़बड़ी होना है और भी कुछ कारण हैं लम्बे समय तक कब्ज रहना मलत्याग के समय जोर लगाना टॉयलेट में काफी देर तक बैठना मोटापे की वजह से बवासीर हो सकती हैं गर्भावस्था के दौरान आखिरी के 3 महीनो में बवासीर हो सकती हैं ज्यादा तली हुई चीजे खाने से व तन..
March 26, 2019

चश्मा उतारने के उपाय और आंखों की रोशनी बढ़ाना । Chasma Utarne Hatane Ke Upay

Home remedies Chasma Hatane Ke Gharelu Upay – आंखों की रोशनी बढ़ाने और चश्मा हटाने का घरेलु उपाय अगर ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करते हुए या किताब, टीवी देखते हुए आपकी आंखे दर्द करने लगती है तो यह आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है। ऐसे में आंखों की रोशनी कमजोर होने से आपकी आंखों पर चश्मा चढ़ जाता है। लेकिन कुछ लोगो को पहले से ही चश्मा चढ़ा हुआ है वो क्या करे ? क्या आप चश्में से छुटकारा पाना चाहते है तो हम आपको बताते हैं आँखों की रोशनी बढ़ाने और चश्मा हटाने का घरेलू उपाय Chasma hatane ke upay). जिनसे आप आसानी से चश्मे से छुटकारा पा सकते हैं। 1. आंखो से स्ट्रेस दूर करने के लिए अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़े, जिससे गर्मी पैदा होगी। फिर आंखे बंद करके हथेलियों को आंखों पर रखें। ध्यान रहें आंखों पर हाथ रखते पर रोशनी बिल्कुल ना आएं। दिन में ऐसा 3-4 बार करें। 2. आंवले के पानी से आंख धोने से या गुलाब जल डालने से आंखे स्वस्थ रहती है। 3. आंखो के हर तरह के रोग जैसे पानी का गिरना, आंखे आना, आंखो की दुर्बलता आदि होने पर रात को 7-8 बादाम भिगोकर सुबह पीसकर पानी में मिलाकर पीए। 4. एक लीटर पा..
March 26, 2019

एके-47 राइफल के बारे में 22 रोचक तथ्य । AK 47 Rifle in Hindi

Amazing Facts Information about AK 47 in Hindi – एके-47 राइफल के बारे में रोचक तथ्यContents 1 Amazing Facts Information about AK 47 in Hindi – एके-47 राइफल के बारे में रोचक तथ्य1.1 AK 47 का आविष्कार किसने किया ?1.2 आतंकवादी ak-47 बंदूक का ही इस्तेमाल क्यों करते है ? आज हम बात करेंगे दुनिया के एक खतरनाक हथियार AK 47 की. जिस तरह से एके-47 राइफल ने तरक्की की है ना शायद ही कोई दूसरी राइफल ऐसा कर पाए. आज मैं इसकी छोटी-मोटी लगभग सब बातें बताऊँगा. So Let’s begin… 1. AK-47 की full form है, Automatic Kalashnikov – 47 (47 मतलब, 1947 में बनी थी). ये नाम इसके फाउंडर Mikhail Kalashnikov के नाम पर रखा गया. AK 47 का आविष्कार किसने किया ? 2. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, एक टैंक कमांडर Mikhail Kalashnikov कंधे में चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती हो गया, वहाँ उसने सेवियत राइफल्स की शिकायत करने वाले घायल सैनिकों की सुनी और इसे बदलने का फैसला किया. और हथियार डिजाइनर के रूप में अपना कैरियर शुरू किया. फिर 1942 से 1947 तक 5 साल की कड़ी मेहनत के बाद एक चीज़ बनाई जिसे आज हम AK 47 कहते है. 3. 1947 में पहल..

PAURANIK KATHA


March 29, 2019

पेशाब रोकने से हो सकते हैं 5 नुकसान,आप भी जान लीजिए

1. ऐसा करने से यूरिनरी ब्लेडर, किडनी या पेशाब की नली में जलन और सूजन की समस्या हो सकती है। यह किडनी के लिए बेहद हानिकारक है। 2. इससे किडनी की कार्य प्रणाली में बाधा होती है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। यह किडनी में पथरी यानि किडनी स्टोन या किडनी संक्रमण का कारण बन सकता है। 3. शरीर की अशुद्धियों को यूरिन के माध्यम से बाहर निकाला जाता है। अगर सही समय पर यूरीन त्याग न हो तो शरीर में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है, जो सबसे ज्यादा किडनी को प्रभावित करता है। 4. देर तक यूरिन रोकने से यूरिनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन या मूत्र मार्ग संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है, जो आपकी सेहत को प्रभावित करता है। 5. ऐसा करने से ब्लेडर में सूजन आने का खतरा बढ़ जाता है और डिस्चार्ज के दौरान तेज दर्द होने की समस्या हो सकती है। Advertisements
March 29, 2019

अंकुरित भोजन

🌺अंकुरित भोजन 🌼परिचय- अंकुरित भोजन शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक संतुलन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। अंकुरित खाद्य केवल भोजन नहीं रह जाता बल्कि उसका स्टार्च ग्लूकोज में और प्रोटीन एमिनो एसिड में बदलकर सुपाच्य के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी हो जाता है। इसलिए इसे पूर्व पचित भोजन (pre-digest) भी कहते हैं। अंकुरित भोजन क्लोरोफिल, विटामिन (`ए´, `बी´, `सी´, `डी´ और `के´) कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम, मैगनीशियम, आयरन, जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत होता है। अंकुरित भोजन भूख बढ़ाने वाला, शरीर के जहरीले तत्व निकालने वाला मूत्रर्वधक होता है। अंकुरित भोजन आपको फिर से जवान बनाने वाला भोजन है जो मनुष्य को सुन्दर स्वस्थ और रोग से छुटकारा दिलाता है। अंकुरित भोजन शरीर को ऊर्जा देने का अच्छा स्रोत है। यह जल्द और आसानी से शरीर द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है। 🌾लाभकारी- अंकुरित भोजन कुपोषण को दूर करता है। अंकुरित भोजन पेट की गैस व कब्ज को दूर करता है। अंकुरित भोजन रोगों को ठीक करने वाला होता है। जानकारी- 🌻 मंहगे फल और सब्जियों की जगह अंकुरित भोजन ले सकते हैं। यह सस्ता, सरल और बनाने में आसान है। इसलिए यह सभी के ब..
March 29, 2019

फोड़े फुंसियाँ और चर्मरोग

🥀 फोड़े फुंसियाँ और चर्मरोगः 🔆चैत्र मास अर्थात् 📆मार्च-अप्रैल में जब नीम की नयी नयी कोंपलें खिलती हैं तब 21 दिन तक प्रतिदिन दातुन कुल्ला करने के बाद ताजी 15 कोंपलें (बच्चों के लिए 7) चबाकर खाने या गोली बनाकर पानी के साथ निगलने या घोंटकर पीने से साल भर फोड़े-फुंसियाँ नहीं निकलतीं। ✅विशेषः खाली पेट इसका सेवन करके कम से कम 2 घंटे तक कुछ न खायें। ✅इससे खून की बहुत सारी खराबियाँ, खुजली आदि चर्मरोग, पित्त और कफ के रोग जड़ से नष्ट होते हैं। ✅इस प्रयोग से मधुमेह की बीमारी से बचाव होता है। ✅इससे मलेरिया और विषमज्वर की उत्पत्ति की सम्भावना भी कम रहती है। 🚫सावधानीः ध्यान रहे कि नीम की 21 कोंपलों और 7 पत्तियों से ज्यादा एवं लगातार बहुत लम्बे समय तक नहीं खायें वरना यौवन-शक्ति कमजोर होती है व वातविकार बढ़ते हैं। इन दिनों तेल, मिर्च, खटाई एवं तली हुई चीजों का परहेज करें। आरोग्य निधि Advertisements
March 28, 2019

Twenty four Rishis Meters Devatâs of Gayatri Mantra Details.

Gayatri Mantra is the ultimate among mantras. Gayatri is a Meter, Chandas. Gayatri is the Mother of All Mantras. Smritis declare that no mantra will yield results for one who does not chant Gayatri. Gayatri Mantra was revealed through Sage Viswamitra. People of three dispositions ,Brahmana, Kshatriya and Vaisya are enjoined to Chant it as a part of Sandhya Vandhana , thrice a day. Sandhya Vandhana has the following components, apart from routine rituals like Aachamana and Pranayama. They are, 1.Purification of Speech,Body and Mind. 2.Obesiance to water and purification by it. 3.Thanksgiving to Ten planets and ancestors. 4.Atoning one’s impure actions( by speech, body and mind) 5.Worship of The Sun. 6.Chanting Gayatri. 7.Worshiping Reality ,Brahman. 8.Realising and offering Worship to Sun as the Visible Reality. 9.Offering the result of Sandhya Vandana to Reality, that is non attachment to action performed. While worshipping Sun, Sun is requested to be present. So is Gayatri. Sun is worshipped as Gayatri and Gayatri as Sun. As Gayatri is a Meter, Chandas, (Anushtup), the Anushtup is invoked. Though Gayatri was revealed through Viswamitra,he did not create or invent it. He, along with other Rishis are invoked; Viswamitra is given pride of place. Twenty four Rishis are associated with Gayatri,one Rishi for one syllable of Gayatri Mantra,totalling twenty four. Sinilarly twenty four chandas are referred to , though Gayatri is Anushtup Chandas. We mention only the following Rishis, Chandas and Devatha ,as a token, when we perform Sandhya Vandana dàily. Rishis. Atri, Bhrigu, Kutsa, Vasishta,Gautama, Kasyapa, Angirasa. Chandas. Gayatri, Ushnik Anushtup. Devatâs. Agni, Vaayu, Arga,Vaagesa, Viswe Deva. The twenty four Rishis. (1) Vâma Deva, (2) Attri, (3) Vas’istha, (4) S’ukra, (5) Kanva, (6) Parâs’ara, (7) the very fiery Vis’vamitra, (8) Kapila, (9) S’aunaka, (10) Yâjñavalkya, (11) Bharadvâja, (12) the ascetic Jamadagni, (13) Gautama, (14) Mudgala, (15) Vedavyâsa, (16) Lomas’a, (17) Agastya, (18) Kaus’ika, (19) Vatsya, (20) Pulastya, (21) Mânduka, (22) the ascetic in chief Durvâsâ, (23) Nârada and (24) Kas’yapa. The Chandas, in order. – (1) Gâyatrî, (2) Usnik, (3) Anustup, (4) Brihatî, (5) Pankti, (6) Trisnup, (7) Jagatî, (8) Atijagatî, (9) S’akkarî, (10) Ati S’akkarî, (11) Dhriti, (12) Ati Dhriti, (13) Virât, (14) Prastârapankti, (15) Kriti, (16) Prâkriti, (17) Âkriti, (18) Vikriti, (19) Samkriti, (20) Aksarapankti, (21) Bhuh, (22) Bhuvah, (23) Svah and (24) Jyotismatî. The Devatâs of the several letters in due order, are :– (1) Agni, (2) Prajâpati, (3) Soma, (4) Îs’âna, (5) Savitâ, (6) Âditya, (7) Brihaspati, (8) Maitrâvaruna, (9) Bhagadeva, (10) Aryamâ, (11) Ganes’a, (12) Tvastrâ, (13) Pûsâ, (14) Indrâgnî, (l5) Vâyu, (16) Vâmadeva, (17) Maitrâ varunî (18) Vis’vadeva, (19) Mâtrikâ, (20) Visnu, (21) Vasu, (22) Rudra Deva, (23) Kuvera, and (24) the twin As’vinî Kumâras. Reference and citation. first Chapter of the Tw..