April 18, 2019

बिना डरे घी खाएं

♥ हार्ट अटैक के रोगी को बिना घी की रोटी खाने की सलाह दे कर मूर्ख बनाया जाता है, आइये जानें सच्चाई….? सनातन पद्धति में पांच अमृत और पंचगव्य की चर्चा है पंच अमृत:-गाय का दूध, दही, घी, देशी खांड और शहद। पंचगव्य:- गाय का दूध, दही, घी, गोबर और गौमूत्र। 🧠 हर घर से एक आवाज जरुर आती है, मेरे लिए बिना घी की रोटी लाना आपके घर से भी आती होगी, लेकिन घी को मना करना सीधा सेहत को मना करना है। पहले के जमाने में लोग रोजमर्रा के खानों में घी का इस्तेमाल करते थे। घी का मतलब देसी गाय का शुद्ध देशी घी। घी को अच्छा माना जाता था। कोलेस्ट्रोल और हार्ट अटैक जैसी बीमारियाँ कभी सुनने में भी नही आती थी। ♥ राजस्थान में अभी भी कई गावों में बारात का स्वागत घी पिला कर किया जाता है अथवा राजस्थानी डिश (खीच/खिचड़ी) परोस कर देशी घी से मनुहार की जाती है…. घी की गलत पब्लिसिटी कर करके बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर अपने बेकार और यूजलेस प्रोडक्ट को भारत में सेल करने के लिए लोगों में घी के प्रति नेगेटिव पब्लिसिटी शुरू कर दी। ये कहा जाता रहा कि घी से मोटापा आता है, कोलेस्ट्रोल बढता है, हार्ट अटैक की सम्भावनाए..
April 18, 2019

मुँह में छाले

👅मुँह में छालेः 🔅पहला प्रयोगः पान में उपयोग किया जाने वाला कोरा कत्था लगाने से छाले में राहत होती है। 🔅दूसरा प्रयोगः सुहागा एवं शहद मिलाकर छालों पर लगाने से या मुलहठी का चूर्ण चबाने से छालों में लाभ होता है। 🔅तीसरा प्रयोगः मुँह के छालों में त्रिफला की राख शहद में मिलाकर लगायें। थूक से मुँह भर जाने पर उससे ही कुल्ला करने से छालों से राहत मिलती है। ✅छाले कब्जियत अथवा जीर्ण ज्वर के कारण होते हैं। अतः इन रोगों का उपचार करें। 🔅🔆आरोग्य निधि 🔆🔅 Advertisements
April 17, 2019

🍃 भूमि आंवला 🍃

🌺भूमि आंवला लिवर के रोगियों के लिए वरदान। 🌹भूमि आंवला लीवर की सूजन, सिरोसिस, फैटी लिवर, बिलीरुबिन बढ़ने पर, पीलिया में, हेपेटायटिस B और C में, किडनी क्रिएटिनिन बढ़ने पर, मधुमेह आदि में चमत्कारिक रूप से उपयोगी हैं। 🌹यह पौधा लीवर व किडनी के रोगो मे चमत्कारी लाभ करता है। यह बरसात मे अपने आप उग जाता है और छायादार नमी वाले स्थानो पर पूरा साल मिलता है। इसके पत्ते के नीचे छोटा सा फल लगता है जो देखने मे आंवले जैसा ही दिखाई देता है। इसलिए इसे भुई आंवला कहते है। इसको भूमि आंवला या भू धात्री भी कहा जाता है। यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है। इसका सम्पूर्ण भाग, जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके गुण इसी से पता चल जाते हैं के कई बाज़ीगर भूमि आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं। 🌹बरसात मे यह मिल जाए तो इसे उखाड़ कर रख ले व छाया मे सूखा कर रख ले। ये जड़ी बूटी की दुकान पंसारी आदि के पास से आसानी से मिल जाता है। 🌷साधारण सेवन मात्रा आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ दिन मे 2-4 बार तक। या पानी मे उबाल कर छान कर भी दे सकते हैं। इस पौधे का ताज़ा रस अधिक गुणकारी है। 🌷लीवर की सूजन, बिलीरुबिन ..
April 17, 2019

पंचकर्म : आयुर्वेद की उत्‍कृष्‍ट चिकित्‍सा पद्धति

पंचकर्म (अर्थात पाँच कर्म) आयुर्वेद की उत्‍कृष्‍ट चिकित्‍सा विधि है। पंचकर्म को आयुर्वेद की विशिष्‍ट चिकित्‍सा पद्धति कहते है। इस विधि से शरीर में होंनें वाले रोगों और रोग के कारणों को दूर करनें के लिये और तीनों दोषों (अर्थात त्रिदोष) वात, पित्‍त, कफ के असम रूप को समरूप में पुनः स्‍थापित करनें के लिये विभिन्‍न प्रकार की प्रक्रियायें प्रयोग मे लाई जाती हैं। लेकिन इन कई प्रक्रियायों में पांच कर्म मुख्‍य हैं, इसीलिये ‘’पंचकर्म’’ कहते हैं। ये पांच कर्मों की प्रक्रियायें इस प्रकार हैं- वमन विरेचन बस्ति – अनुवासन बस्ति – आस्‍थापन नस्‍य उपरोक्‍त पांच को मुख्‍य अथवा प्रधान कर्म कहते हैं। परिचय- आयुर्वेद पंचकर्म चिकित्सा पद्धति देश की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। देश के दक्षिणी भाग में यह बहुत लोकप्रिय है और सामान्यतौर पर लोक जीवन में स्वीकार्य है। उत्तर भारत में यह पद्धति हाल ही में उपयोग में लाई जा रही है। इस पद्धति में शरीर के विषों को बाहर निकालकर शुद्ध किया जाता है। इसी से रोग निवारण भी हो जाता है। पंचकर्म, आयुर्वेद शास्त्र में वर्णित एक विशेष चिकित्सा पद्धति है, जो दोषों ..
April 16, 2019

संग का रंग लगता ही है या कि यह…

भगवान, संग का रंग लगता ही है या कि यह केवल संयोग मात्र है? कृपा कर समझावें! ओशो:- राजेंद्र भारती, सब तुम पर निर्भर है। वर्षा होती हो और तुम छाता लगा कर खड़े हो जाओ, तो भीगोगे नहीं। छाता बंद कर लो, और भीग जाओगे। वर्षा होती हो, तुम छिद्र वाला घड़ा ले जाकर आकाश के नीचे रख दो; भर भी जाएगा और फिर भी खाली हो जाएगा। छिद्र बंद कर दो, भरेगा और भरा रह जाएगा। वर्षा होती हो, छिद्रहीन घड़े को भी आकाश के नीचे ले जाकर उलटा रख दो; तो वर्षा होती रहेगी और घड़ा खाली का खाली रहेगा। सब तुम पर निर्भर है। सदगुरु तो वर्षा है–अमृत की वर्षा! तुम लोगे तो तुम्हारे प्राणों को रंग जाएगा। तुम न लोगे, द्वार-दरवाजे बंद किए बैठे रहोगे, तो चूक जाओगे। तुम पूछ रहे हो: “संग का रंग लगता ही है या कि यह केवल संयोग मात्र है?’ अनिवार्यता नहीं है और संयोग भी नहीं। संग का रंग लगता ही होता, तब तो जो भी सदगुरु के पास आ जाता उसी को रंग लग जाता। फिर तो जिन्होंने जीसस को सूली दी, वे सूली देते-देते रंग गए होते। फिर तो जिन्होंने बुद्ध को पत्थर मारे, वे पत्थर मारते-मारते रंग गए होते। संग का रंग लगे ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है। ऐसी अनिवार्यता..

PAURANIK KATHA


October 11, 2018
प्रथम देवी शैलपुत्री

नवरात्रि की प्रथम देवी शैलपुत्री

नवरात्रि की प्रथम देवी शैलपुत्री वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ । वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥ नवरात्रि के पावन पर्व के मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-उपासना […]
September 29, 2018
Das-Mahavidya-Kaun-Hai-Gupt-navratra

Das Mahavidya Kaun Hai – Navratri-Navdurga

नवदुर्गा के इन रहस्यों को शर्तिया आप नहीं जानते होंगे दस महाविद्याएं कौन हैं? दस महाविद्याओं में से कुछ देवी अम्बा हैं, तो कुछ सती या […]
March 18, 2018

Navratri Ke 9 Mantra In Hindi

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।। पंचमं स्क्न्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।। नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।। Prathamam Shailputri ch dwitiyam brahmcharini. Tritiyam Chandrghanteti Kushmandeti Chaturthakam. Panchamam Skandmateti Shashtam Katyayniti ch. Saptamam Kalratri Maha Gauri ch Ashtmam. Navmam Sidhidatri ch […]
December 25, 2017

Durgaashtakam – Peaceful Music For Protection, Healing, Relaxation and Meditation