April 16, 2019

🙏!! प्रकृति संतुलन मांगती है !!🙏

हेनरी फोर्ड ने अपने संस्मरण में लिखवाया है कि मैं भी एक पागल हूं। क्योंकि जब एयरकंडीशनिंग आई, तो मैंने अपने सब भवन एयरकंडीशन कर दिए। कार भी एयरकंडीशन हो गई। अपने एयरकंडीशन भवन से निकलकर मैं अपनी पोर्च में अपनी एयरकंडीशन कार में बैठ जाता हूं। फिर तो बाद में उसने अपना पोर्च भी एयरकंडीशन करवा लिया। कार निकलेगी, तब आटोमेटिक दरवाजा खुल जाएगा। कार जाएगी, दरवाजा बंद हो जाएगा। फिर इसी तरह वह अपने एयरकंडीशंड पोर्च में दफ्तर के पहुंच जाएगा। फिर उतरकर एयरकंडीशंड दफ्तर में चला जाएगा। फिर उसको तकलीफ शुरू हुई। तो डाक्टरों से उसने पूछा कि क्या करें? तो उन्होंने कहा कि आप रोज सुबह एक घंटा और रोज शाम एक घंटा काफी गरम पानी के टब में पड़े रहें। गरम पानी के टब में पड़े रहने से हेनरी फोर्ड ने लिखा है कि मेरा स्वास्थ्य बिलकुल ठीक हो गया। क्योंकि एक घंटे सुबह मुझे पसीना-पसीना हो जाता, शाम को भी पसीना-पसीना हो जाता। लेकिन तब मुझे पता चला कि मैं यह कर क्या रहा हूं! दिनभर पसीना बचाता हूं, तो फिर दो घंटे में इंटेंसली पसीने को निकालना पड़ता है, तब संतुलन हो पाता है। प्रकृति पूरे वक्त संतुलन मांगेगी। तो जो लोग बहुत व..
April 15, 2019

किडनी खराब होने के लक्षण और उपचार

किडनी खराब होने के लक्षण और आयुर्वेदिक जडी बुटी से उपचार शरीर के कुछ अंग बहुत ही अहम होते हैं क्योंकि उनसे ही पूरे शरीर का सिस्टम सुचारू रूप से चलता है जिनमे से एक है गुर्दा होता है. गुर्दा यानी किडनी जो शरीर के अन्य अंगों की तरह बेहद अहम और नाज़ुक होती हैं, इसके असन्तुलित हो जाने से पूरे शरीर की स्थिति बिगड़ जाती है, इसलिए इनका खास ध्यान रखने की जरूरत होती है. आज के दौर में जैसे जैसे उन्नति होती जा रही है वैसे-वैसे किडनी रोग से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. जबकि बहुत सी छोटी-छोटी बातों को अपनाकर किडनी खराब होने के लक्षण या किडनी की बीमारी से बचाव कर सकते है. किडनी इंसान की मुट्ठी के साइज की होती हैं. यह रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ पाई जाती हैं. किडनी स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनका सबसे महत्वपूर्ण काम खून को फ़िल्टर करके उसमें से खराब पदार्थों को यूरिन के रूप में शरीर से बाहर निकालना होता है और शारीरिक संतुलन बनाए रखना होता है. किडनी खून को साफ़ करके और उसमें से खराब पदार्थ , क्रियेटिनिन, यूरिया, पोटैशियम, जहरीले पदार्थ और आवश्यकता से अधिक पानी को ब..
April 15, 2019

किडनी के रोगियों के लिए 3 रामबाण प्रयोग

किडनी के रोगी चाहे उनका डायलासिस चल रहा हो या अभी शुरू होने वाला हो, चाहे उनका क्रिएटिनिन या यूरिया कितना भी बढ़ा हो, और अगर डॉक्टर्स ने भी उनको किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बोल दिया हो, ऐसे में उन रोगियों के लिए विशेष 3 रामबाण प्रयोग हैं, जो उनको इस प्राणघातक रोग से छुटकारा दिला सकते हैं। 1. गोखरू काँटा काढ़ा:- 250 ग्राम गोखरू कांटा (ये आपको पंसारी से मिल जायेगा) लेकर 4 लीटर पानी मे उबालिए जब पानी एक लीटर रह जाए तो पानी छानकर एक बोतल मे रख लीजिए और गोखरू कांटा फेंक दीजिए। इस काढे को सुबह शाम खाली पेट हल्का सा गुनगुना करके 100 ग्राम के करीब पीजिए। शाम को खाली पेट का मतलब है दोपहर के भोजन के 5, 6 घंटे के बाद। काढ़ा पीने के एक घंटे के बाद ही कुछ खाइए और अपनी पहले की दवाई ख़ान पान का रोटिन पूर्ववत ही रखिए। 2. गेंहू के जवारो और गिलोय का रस:- गेंहू के जवारे (गेंहू घास) का रस गिलोय(अमृता) का रस। गेंहू के जवारों का रस 50 ग्राम और गिलोय (अमृता की एक फ़ीट लम्बी व् एक अंगुली मोटी डंडी) का रस निकालकर – दोनों का मिश्रण दिन में एक बार रोज़ाना सुबह खाली पेट निरंतर लेते रहने से आशातीत लाभ होता है। इस मिश..
April 9, 2019

मृत्यु का आध्यात्मिक अर्थ

एक ही उपाय है: पांचवां दिन। चार दिन जिंदगी के। ये जिंदगी के चार दिन ऐसे ही बीत जाते हैं— दो आरजू में, दो इंतजार में। दो मांगने में, दो प्रतीक्षा करने में। कुछ हाथ कभी लगता नहीं। पांचवां दिन असली दिन है। जब भी तुम्हें समझ आ गई इस बात की, कि मेरा होना ही मेरे होने में अड़चन है… क्योंकि मेरे होने का मतलब है कि मैं परमात्मा से अलग हूं। मेरे होने का मतलब है कि मैं इस विराट से अलग हूं। मेरे होने का मतलब है कि मैं एक नहीं, संयुक्त नहीं, इस परिपूर्ण के साथ एकरस नहीं। यही तो अड़चन है। यही दुख है। यही नरक है। दीवाल हट जाए। यह मेरे होने का भाव खो जाए —मृत्यु। मृत्यु का अर्थ यह नहीं कि तुम जाकर गरदन काट लो अपनी। मृत्यु का यह अर्थ नहीं कि जाकर जहर पी लो। मृत्यु का अर्थ है: अहंकार काट दो अपना। मैं हूं तुझसे अलग, यह बात भूल जाए। मैं हूं तुझमें। मैं हूं ऐसे ही तुझमें जैसे लहर सागर में। लहर सागर से अलग नहीं हो सकती। कितनी ही छलांग ले और कितनी ही ऊंची उठे, जहाजों को डुबाने वाली हो जाए। पहाड़ों को डूबा दे—लेकिन लहर सागर से अलग नहीं हो सकती। लहर सागर में है, सागर की है। ऐसे ही तुम हो— विराट चैतन्य के ..
April 2, 2019

दस चमत्कारिक पत्तियां

वैदिक ऋषियों और आयुर्वेद के जानकारों ने जीवन की सुख और समृद्धि के कई उपाय ढूंढे थे। इसके लिए उन्होंने समुद्र, रेगिस्तान, हिमालय और जंगल के हर तरह के रहस्य को जाना और फिर उन्होंने ऐसी चीजें ढूंढी जिसके दम पर व्यक्ति अजर-अमर ही नहीं रह सकता है बल्कि सुख और समृद्धि भी पा सकता है।इंसान ने ईश्वर के बाद प्रकृति को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है, क्योंकि प्रकृति से वह सब कुछ पाया जा सकता है, जो हम पाना चाहते हैं। एक और मनुष्य प्रकृति का बेहिसाब और अनावश्यक दोहन कर रहा है, तो दूसरी ओर वह प्रकृति को नष्ट करने का कार्य भी कर रहा है। इसका परिणाम भी हमें देखने को मिल रहा है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति अपने घर के आसपास एक पीपल, एक नीम, इमली, तीन कैथ, तीन बेल, तीन आंवला और पांच आम के वृक्ष लगाता है, वह पुण्यात्मा होता है और कभी नरक के दर्शन नहीं करता। इसी तरह धर्मशास्त्रों में सभी तरह से वृक्ष सहित प्रकृति के सभी तत्वों के महत्व की विवेचना की गई है। इन पत्तों का धर्मशास्त्रों में उल्लेख ही नहीं मिलता बल्कि इनके पौधों या वृक्षों की पूजा करने का विधान भी है। आओ जानते हैं हम उन दस पौधों या वृक्षों..

PAURANIK KATHA


September 29, 2018
Das-Mahavidya-Kaun-Hai-Gupt-navratra

Das Mahavidya Kaun Hai – Navratri-Navdurga

नवदुर्गा के इन रहस्यों को शर्तिया आप नहीं जानते होंगे दस महाविद्याएं कौन हैं? दस महाविद्याओं में से कुछ देवी अम्बा हैं, तो कुछ सती या […]
September 10, 2018
भैरव साधना एवं सिद्धि के प्रभाव

kaal bhairav batuk bhairav shabar mantra sadhna

ॐ श्री काल भैरव बटुक भैरव शाबर स्तोत्र मंत्र ॐ श्री काल भैरव बटुक भैरव शाबर स्तोत्र मंत्र ॐ अस्य श्री बटुक भैरव शाबर स्तोत्र मन्त्रस्य […]
August 14, 2018
kala-jadu-kya-hota-hai-or-isse-kaise-bache

काला जादू क्या होता है, कैसे बचे इससे

काला जादू, टोने, टोटके या अन्य किसी के द्वारा किया कराया जैसी बातें भी समाज में प्रचलित है। हालांकि इनकी सचाई के बारे में कोई नहीं […]
August 13, 2018
मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए नाना प्रकार की सिद्धियाँ की एवं उस पर विजय प्राप्त करने के बाद स्वार्थ-परमार्थ दोनों कार्य भी किए। किसी ने भैरव को, किसी ने दुर्गा को, किसी ने हनुमान जी को इस प्रकार सभी ने अपने-‍अपने हिसाब से देवताओं की आराधना कर सिद्ध किया और अपने कार्य को किया।

Guru Gorakhnath ka Priya mantra Janjira

मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए नाना प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त की एवं उस पर विजय प्राप्त करने के बाद स्वार्थ-परमार्थ दोनों कार्य भी किए। किसी […]