भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है।

अघोरपंथ के जन्मदाता भी भगवान शिव ही हैं। पवित्र श्रावण मास चल रहा है। इस महीने में मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा का विधान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव की पूजा के दो तरीके बताए गए हैं पहला है सात्विक व दूसरा तामसिक। सात्विक पूजा के अंतर्गत भगवान शिव की पूजा फल, फूल, जल आदि से की जाती है। वहीं तामसिक पूजा के अंतर्गत तंत्र-मंत्र आदि से शिव को प्रसन्न किया जाता है।
November 23, 2017

गांधारी के श्राप के कारण हुआ यदुवंश का नाश

अठारह दिन चले महाभारत के युद्ध में रक्तपात के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ। इस युद्ध में कौरवों के समस्त कुल का नाश हुआ, साथ ही […]
November 23, 2017

दानवीर कर्ण थे पूर्वजन्म के पापी, उन्हीं का मिला दंड

कर्ण जिन्हें सूर्यपुत्र, राधेय, वासुसेना, अंगराज, जैसे कई नामों से जाना जाता है, कर्ण जोकि अर्जुन से श्रेष्ठ धनुर्धर और महान यौद्धा था। जिसे धृतराष्ट्र के […]
November 20, 2017

जानिये जन्मदिन के अनुसार कैसा होता है जातक का स्वाभाव

ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति का जन्म जिस वार को होता है, उस वार के कारक ग्रह का प्रभाव भी जीवनभर बना रहता है। ज्योतिष के अनुसार […]
January 9, 2015
Dhyan Ka Arth or suksham man ko janna

Dhyan Ka Arth or Suksham man ko Janna

आज हम बात करे गए ध्यान के अर्थ की । ध्यान का अर्थ है मन की या अपनी आत्मा की गहराई में उतरना जंहा मनुष्य को […]
May 11, 2014

जानिए कितने रुद्राक्ष से बनी माला कौन-से अंग पर पहननी चाहिए

रुद्राक्ष भगवन शिव का एक अंश है । उसकी उत्पति भगवन शिव के अश्रु से हुई है । शिव पुराण में रुद्राख को धार करने के नियम बताये गए है ।