April 9, 2019

मृत्यु का आध्यात्मिक अर्थ

एक ही उपाय है: पांचवां दिन। चार दिन जिंदगी के। ये जिंदगी के चार दिन ऐसे ही बीत जाते हैं— दो आरजू में, दो इंतजार में। दो मांगने में, दो प्रतीक्षा करने में। कुछ हाथ कभी लगता नहीं। पांचवां दिन असली दिन है। जब भी तुम्हें समझ आ गई इस बात की, कि मेरा होना ही मेरे होने में अड़चन है… क्योंकि मेरे होने का मतलब है कि मैं परमात्मा से अलग हूं। मेरे होने का मतलब है कि मैं इस विराट से अलग हूं। मेरे होने का मतलब है कि मैं एक नहीं, संयुक्त नहीं, इस परिपूर्ण के साथ एकरस नहीं। यही तो अड़चन है। यही दुख है। यही नरक है। दीवाल हट जाए। यह मेरे होने का भाव खो जाए —मृत्यु। मृत्यु का अर्थ यह नहीं कि तुम जाकर गरदन काट लो अपनी। मृत्यु का यह अर्थ नहीं कि जाकर जहर पी लो। मृत्यु का अर्थ है: अहंकार काट दो अपना। मैं हूं तुझसे अलग, यह बात भूल जाए। मैं हूं तुझमें। मैं हूं ऐसे ही तुझमें जैसे लहर सागर में। लहर सागर से अलग नहीं हो सकती। कितनी ही छलांग ले और कितनी ही ऊंची उठे, जहाजों को डुबाने वाली हो जाए। पहाड़ों को डूबा दे—लेकिन लहर सागर से अलग नहीं हो सकती। लहर सागर में है, सागर की है। ऐसे ही तुम हो— विराट चैतन्य के ..
April 2, 2019

दस चमत्कारिक पत्तियां

वैदिक ऋषियों और आयुर्वेद के जानकारों ने जीवन की सुख और समृद्धि के कई उपाय ढूंढे थे। इसके लिए उन्होंने समुद्र, रेगिस्तान, हिमालय और जंगल के हर तरह के रहस्य को जाना और फिर उन्होंने ऐसी चीजें ढूंढी जिसके दम पर व्यक्ति अजर-अमर ही नहीं रह सकता है बल्कि सुख और समृद्धि भी पा सकता है।इंसान ने ईश्वर के बाद प्रकृति को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है, क्योंकि प्रकृति से वह सब कुछ पाया जा सकता है, जो हम पाना चाहते हैं। एक और मनुष्य प्रकृति का बेहिसाब और अनावश्यक दोहन कर रहा है, तो दूसरी ओर वह प्रकृति को नष्ट करने का कार्य भी कर रहा है। इसका परिणाम भी हमें देखने को मिल रहा है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति अपने घर के आसपास एक पीपल, एक नीम, इमली, तीन कैथ, तीन बेल, तीन आंवला और पांच आम के वृक्ष लगाता है, वह पुण्यात्मा होता है और कभी नरक के दर्शन नहीं करता। इसी तरह धर्मशास्त्रों में सभी तरह से वृक्ष सहित प्रकृति के सभी तत्वों के महत्व की विवेचना की गई है। इन पत्तों का धर्मशास्त्रों में उल्लेख ही नहीं मिलता बल्कि इनके पौधों या वृक्षों की पूजा करने का विधान भी है। आओ जानते हैं हम उन दस पौधों या वृक्षों..
April 2, 2019

बालो के लिए उपचार

बालों के लिये २७ प्रभावशाली उपाय 1- घी खाएं और बालों के जड़ों में घी मालिश करें। 2- गेहूं के जवारे का रस पीने से भी बाल कुछ समय बाद काले हो जाते हैं। 3- तुरई या तरोई के टुकड़े कर उसे धूप मे सूखा कर कूट लें। फिर कूटे हुए मिश्रण में इतना नारियल तेल डालें कि वह डूब जाएं। इस तरह चार दिन तक उसे तेल में डूबोकर रखें फिर उबालें और छान कर बोतल भर लें। इस तेल की मालिश करें। बाल काले होंगे। 4- नींबू के रस से सिर में मालिश करने से बालों का पकना, गिरना दूर हो जाता है। नींबू के रस में पिसा हुआ सूखा आंवला मिलाकर सफेद बालों पर लेप करने से बाल काले होते हैं। 5- बर्रे(पीली) का वह छत्ता जिसकी मक्खियाँ उड़ चुकी हो 25 ग्राम, 10-15 देसी गुड़हल के पत्ते,1/2 लीटर नारियल तेल में मंद मंद आग पर उबालें सिकते-सिकते जब छत्ता काला हो जाये तो तेल को अग्नि से हटा दें. ठंडा हो जाने पर छान कर तेल को शीशी में भर लें. प्रतिदिन सिर पर इसकी हल्के हाथ से मालिश करने से बाल उग जाते हैं और गंजापन दूर होता है. 6- कुछ दिनों तक, नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। बाल सफेद से काले होने लगेंगे। 7- नीबू के रस में आंवला..
April 2, 2019

गिलोय के अनुप्रयोग

भिन्न रोगों और मौसम के अनुसार गिलोय के अनुप्रयोग गिलोय एक रसायन है, यह रक्तशोधक, ओजवर्धक, ह्रुदयरोग नाशक ,शोधनाशक और लीवर टोनिक भी है। यह पीलिया और जीर्ण ज्वर का नाश करती है अग्नि को तीव्र करती है, वातरक्त और आमवात के लिये तो यह महा विनाशक है। गिलोय के 6″ तने को लेकर कुचल ले उसमे 4 -5 पत्तियां तुलसी की मिला ले इसको एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर इसका काढा बनाकर पीजिये। और इसके साथ ही तीन चम्मच एलोवेरा का गुदा पानी में मिला कर नियमित रूप से सेवन करते रहने से जिन्दगी भर कोई भी बीमारी नहीं आती। और इसमें पपीता के 3-4 पत्तो का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है यह चिकन गुनियां डेंगू स्वायन फ्लू और बर्ड फ्लू में रामबाण होता है। गैस, जोडों का दर्द ,शरीर का टूटना, असमय बुढापा वात असंतुलित होने का लक्षण हैं। गिलोय का एक चम्मच चूर्ण को घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है । गिलोय का चूर्ण शहद के साथ खाने से कफ और सोंठ के साथ आमवात से सम्बंधित बीमारीयां (गठिया) रोग ठीक होता है। गिलोय..
April 1, 2019

गिलोय के अनुप्रयोग

भिन्न रोगों और मौसम के अनुसार गिलोय के अनुप्रयोग गिलोय एक रसायन है, यह रक्तशोधक, ओजवर्धक, ह्रुदयरोग नाशक ,शोधनाशक और लीवर टोनिक भी है। यह पीलिया और जीर्ण ज्वर का नाश करती है अग्नि को तीव्र करती है, वातरक्त और आमवात के लिये तो यह महा विनाशक है। गिलोय के 6″ तने को लेकर कुचल ले उसमे 4 -5 पत्तियां तुलसी की मिला ले इसको एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर इसका काढा बनाकर पीजिये। और इसके साथ ही तीन चम्मच एलोवेरा का गुदा पानी में मिला कर नियमित रूप से सेवन करते रहने से जिन्दगी भर कोई भी बीमारी नहीं आती। और इसमें पपीता के 3-4 पत्तो का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है यह चिकन गुनियां डेंगू स्वायन फ्लू और बर्ड फ्लू में रामबाण होता है। गैस, जोडों का दर्द ,शरीर का टूटना, असमय बुढापा वात असंतुलित होने का लक्षण हैं। गिलोय का एक चम्मच चूर्ण को घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है । गिलोय का चूर्ण शहद के साथ खाने से कफ और सोंठ के साथ आमवात से सम्बंधित बीमारीयां (गठिया) रोग ठीक होता है। गिलोय..

PAURANIK KATHA