भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है।

अघोरपंथ के जन्मदाता भी भगवान शिव ही हैं। पवित्र श्रावण मास चल रहा है। इस महीने में मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा का विधान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव की पूजा के दो तरीके बताए गए हैं पहला है सात्विक व दूसरा तामसिक। सात्विक पूजा के अंतर्गत भगवान शिव की पूजा फल, फूल, जल आदि से की जाती है। वहीं तामसिक पूजा के अंतर्गत तंत्र-मंत्र आदि से शिव को प्रसन्न किया जाता है।
December 28, 2017
agyat ki aur

अज्ञात की ओर Aghori Secrets

अज्ञात की ओर केवल अति साहसिक व्यक्ति ही जा सकते हैं, पूर्ण समर्पण, पूर्ण श्रद्धा चाहिये । तभी अनन्त की ओर अज्ञात में जाया जा सकता […]
December 27, 2017
vigyan bhairav tantra sutra vidhi 1

Tantra Sutra Vidhi – 1 OSHO

Tantra Sutra Vidhi शिव कहते है: हे देवी, यह अनुभव दो श्‍वासों के बीच घटित हो सकता है। श्‍वास के भीतर आने के पश्‍चात और बाहर […]
December 25, 2017

Durgaashtakam – Peaceful Music For Protection, Healing, Relaxation and Meditation

December 25, 2017
pingala rishi

Ese Rishi Jinhone Binary system ki Rachna Varsho Pehle ki

‘चन्द्रष्ट’, ऋषि पिंगला का निर्माण, जिसे पिंगला-सूत्र भी कहा जाता है, संस्कृत प्रोसॉडी पर सबसे पहले ज्ञात ग्रंथ है। कॉम्बिनाटोरिक्स में पिंगला का ग्रंथ गॉटफ्रिड लेबिनित्ज़ […]
December 25, 2017
किसी भी सैद्धांतिक साधना के लिए साधक को न्यूनतम डेढ़ से दो घंटे तक के स्थिर आसन पर पूर्ण एकाग्रता व साधना काल में ब्रह्मचर्य का अभ्यास होना अनिवार्य होता है !

sadhak ka man or yogyata

साधक के लक्षण व योग्यताएं किसी भी सैद्धांतिक साधना के लिए साधक को न्यूनतम डेढ़ से दो घंटे तक के स्थिर आसन पर पूर्ण एकाग्रता व […]