भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है।

अघोरपंथ के जन्मदाता भी भगवान शिव ही हैं। पवित्र श्रावण मास चल रहा है। इस महीने में मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा का विधान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव की पूजा के दो तरीके बताए गए हैं पहला है सात्विक व दूसरा तामसिक। सात्विक पूजा के अंतर्गत भगवान शिव की पूजा फल, फूल, जल आदि से की जाती है। वहीं तामसिक पूजा के अंतर्गत तंत्र-मंत्र आदि से शिव को प्रसन्न किया जाता है।
December 6, 2017

24 types of Gayatri Mantra

 Gayatri Mantra गायत्री मंत्र को ब्रह्मर्षि विश्वामित्र से पहले पेश किया गया था। गायत्री मंत्र का मूल महत्व सूर्य भगवान की पूजा है। वेदों के अनुसार, […]
December 3, 2017

कौरव सो नहीं एक सो दो थे कौरवो के जन्म से जुडी रोचक कथा

आप सभी को यह सुनकर आश्चर्य होता होगा कि एक ही माँ की एक सो एक संताने कैसे हो सकती हैं ? माता गांधारी एवम धृतराष्ट्र […]
November 30, 2017

शास्त्रों के अनुसार यह 6 गुण है सच्चे दोस्त की निशानी

सत्चे मित्र और सत्रु को पह्चान्ने के बारे मे शास्त्रों मे बहुत से बाते बतई गयी है । जिन्हें समज कर कोई भी अपने मित्र और […]
November 29, 2017

श्रीहनुमत्ताण्डवस्तोत्रम्

यह हनुमान तांडव स्त्रोत सावधानी से पढ़ना चाहिए। इसके पढ़ने से हर तरह के संकट, रोग, शोक आदि सभी तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाते हैं। […]
November 29, 2017

भैरव नाथ के गुप्त मंत्र के बारे मे जाने

भैरव शिव जी के ही रूद्र अवतार है। इनका अवतार आवश्क्ता के अनुसार भगवान शिव के अंश से हुआ है । इनका अवतार अहंकार और असत्य […]